सागर में बदला शराब बाजार का ट्रेंड- ओवर रेट से अब अंडर रेट बिक्री ने बढ़ाई आबकारी की चिंता

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सागर में बदला शराब बाजार का ट्रेंड: ओवर रेट से अब अंडर रेट बिक्री ने बढ़ाई आबकारी की चिंता

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सागर। कभी निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बिक्री की शिकायतों से जूझ रहा आबकारी विभाग इस वर्ष उलट स्थिति का सामना कर रहा है। अब जिले में कई स्थानों पर प्रतिस्पर्धा के चलते निर्धारित दर (एमएसपी) से कम कीमत पर शराब बिकने की खबरों ने विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

जानकारों के मुताबिक शहर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में दुकानदार ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कम रेट पर शराब बेच रहे हैं। इससे जहां एक ओर सुरा प्रेमियों को राहत मिल रही है, वहीं आबकारी विभाग के राजस्व और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ब्रांड की किल्लत और रेट का इंतजार
बहरहाल, वर्तमान स्थिति पूरी तरह संतुलित नहीं नजर आती, दुकानों पर अभी सभी ब्रांड की शराब उपलब्ध नहीं हो पा रही है और नए रेट भी जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में ब्रांड पसंद करने वाले उपभोक्ताओं को अब भी अपनी पसंद की शराब के लिए जिले से बाहर जाना पड़ रहा है।

सूत्र बताते हैं कि आबकारी ठेकेदारों के बीच शराब की निकासी (वेयरहाउस से उपलब्धता) को लेकर रोजाना असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सप्लाई चेन पूरी तरह पटरी पर नहीं आने से बाजार में असंतुलन बना हुआ है।

पिछले साल हालात बिल्कुल अलग थे। तब सस्ती शराब के लिए लोग दमोह, विदिशा जैसे जिलों की ओर रुख करते नजर आते थे, लेकिन इस बार सागर जिले में ही कम कीमत पर शराब उपलब्ध होने की चर्चाएं हैं। इससे स्थानीय स्तर पर बिक्री बढ़ने की संभावना तो है, लेकिन अनियमितता का खतरा भी उतना ही बढ़ गया है।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2023-24 में भी ऐसी स्थिति बनने पर आबकारी विभाग ने बैठक आयोजित कर निर्धारित दरों पर बिक्री सुनिश्चित कराने के लिए आपसी सहमति बनवाई थी। इस बार भी विभाग सक्रिय हो गया है और विशेष टीमों का गठन कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के अनुसार टीमों द्वारा विभिन्न दुकानों पर दबिश देकर रेट लिस्ट और बिक्री की जांच की जा रही है। यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

जनता को राहत, विभाग असमंजस में
जहां आम उपभोक्ता सस्ती शराब मिलने से राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं आबकारी विभाग के सामने नियमों का पालन करवाने और राजस्व संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

 

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