भारतीय सेना दुनिया में चौथे नंबर पर, लेकिन वीरता में नंबर-1 – कारगिल वीरों ने युवाओं में भरा जोश
सागर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय सागर में कारगिल विजय उत्सव एवं सम्मान समारोह के अंतर्गत कारगिल युद्ध में सहभागिता करने वाले तीन सैनिकों का सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप पूजन करके किया गया। स्वागत भाषण देते हुए महाविद्यालय की प्रचार डॉक्टर सरोज गुप्ता ने कहा की कारगिल विजय भारतीय सेना के शौर्य और वीरता की कहानी बताती है। भारतीय सेना ने अपने इतिहास की सबसे दुर्गम विजय प्राप्त कर यह सिद्ध किया था कि युद्ध हथियारों से नहीं साहस और जुनून से लड़ा जाता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मेजर एस सी शर्मा ने एनसीसी एवं एन एसएस के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना भले ही विश्व में चतुर्थ स्थान पर है लेकिन हमारे सैनिक अपनी वीरता के लिए प्रथम स्थान पर हैं। लड़ाई मिसाइल और हथियारों से नहीं लड़ी जाती बल्कि लड़ाई जीतने के लिए आत्मबल, शारीरिक बल, आध्यात्मिक बल के साथ देशभक्ति का जुनून होना चाहिए। सेना में सेवा के विषय में आपने बताया कि 1962 में सिपाही के रूप में भर्ती होकर अनुशासन व जुनून के दम पर मेजर पद तक पहुंचा। विशिष्ट अतिथि मेजर गिरी राज सिंह ने कहा कि जब तक आप अपने आप को नहीं संभालते तब तक आप देश को नहीं संभाल सकते औरअपने आप को संभालने के लिए अपनी आदतों को संभालना होगा ।आज आप रात्रि में 4:00d बजे सोने जाते है जब हमारा जागने का समय होता है। आपकी आदतों मेंसुधार करना होगा ।समय को किल मत करो अन्यथा वह आपको किल कर देगा।अध्यक्षता करते हुए कैप्टन उपेंद्र भदौरिया जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ने बताया कि सागर जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि 10 सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए शहादत दी है।आपने सेना में नेवी के योगदान की चर्चा की। एडवोकेट वीनू राणा ने कहा कि इन अधिकारियों के द्वारा पढ़ाया गया पाठ आपको परीक्षा में तो नहीं आएगा लेकिन जीवन में बहुत काम आएगा।महाविद्यालय परिवार में कारगिल विजय में सहभागिता करने वाले हवलदार श्री राम अहिरवार, हवलदार श्रवण सिंह ठाकुर, बृजेश कुमार का शाल,श्रीफल तथा मोमेंटो से स्वागत किया। सूबेदार श्री राम अहिरवार ने बताया की युद्ध की अवधि में हम चार दिन पुरानी पुड़ी खा रहे होते हैं जबकि घर पर हमारी मां ताजी पूड़ी खिलाने के लिए हमारे आगे पीछे घूमती है। जिन सैनिकों के साथ हमने रात में खाना खाया उनमें से चार सैनिकों की शहादत हमने अपनी आंखों से देखी सूबेदार बृजेश कुमार ने बताया कारगिल युद्ध में पाकिस्तान ने लाहौर समझौता का उल्लंघन करके पहाड़ोंपर कब्जा किया लेकिन भारतीय सेवा ने हमेशा की तरह उसे युद्ध में पटकनी दी। विश्व के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक कारगिल में युद्ध जीत कर हमारी सेना ने देश का मान बढ़ाया है।कार्यक्रम के अंत में शहीद सैनिको के सम्मान में मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ अमर कुमार जैन प्राध्यापक ने कहा कि 26 जुलाई कारगिल विजय दिवस देश के लिए किसी राष्ट्रीय पर्व से कम नहीं है, आभार डॉ राणा कुंजर ने माना। कार्यक्रम में डॉ अभिलाषा जैन, डॉ अवधेश प्रताप सिंह,डा दयाराम राजपूत, लेफ्टिनेंट डा जयनारायण यादव,लेफ्टिनेंट कीर्ति रैकवार, डा भानुप्रिया पटेल, डा वसुंधरा गुप्ता सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।


