जिले में मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग का ढीला रवैया, यदाकदा कार्रवाई, निजी कर्मी पर सवाल

जिले में मिलावटखोरों पर खाद्य सुरक्षा विभाग का ढीला रवैया, यदाकदा कार्रवाई, निजी कर्मी पर सवाल

गजेंद्र ठाकुर- सागर। मध्य प्रदेश शासन के “शुद्ध आहार अभियान” के तहत कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा जिले में दूध एवं दुग्ध उत्पादों में मिलावट रोकने के लिए कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने सागर शहर, बंडा और बीना क्षेत्र में कुछ जगहों पर दूध, पनीर, खोवा सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए। हालांकि जिले में इस तरह की कार्रवाई केवल यदाकदा ही देखने को मिलती है, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का कहना है कि यदि पूरे वर्ष नियमित रूप से सघन जांच अभियान चलाए जाएं तो मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, विभाग में निजी कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सूत्र बताते हैं कुछ निजी कर्मियों की डेयरी, मिल, चक्की और खाद्य कारोबारियों से सांठगांठ हैं वहीं नमूने लेने और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी लोगों में शंकाएं व्यक्त की जाती रही हैं।

लोगो का कहना हैं खाद्य सुरक्षा विभाग से अपेक्षा की जा रही है कि वह केवल अभियान के दौरान ही नहीं, बल्कि पूरे वर्ष नियमित और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही नमूना जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाकर दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई करे, ताकि आम जनता को मिलावट से मुक्त खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके और शासन के अभियान का उद्देश्य वास्तविक रूप से पूरा हो सके।

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