सागर स्मार्ट सिटी: CCTV-ITMS प्रोजेक्ट में करोड़ों की गड़बड़ी! बिना काम किए कंपनी को भुगतान का आरोप
सागर। सागर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीसीटीवी सर्विलांस और आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) प्रोजेक्ट में गंभीर तकनीकी व वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। नियमों को ताक पर रखकर वेंडर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को चपत लगाने का मामला सामने आने के बाद अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच और रिकवरी की मांग तेज हो गई है।
मुख्य गड़बड़ियां जिन पर उठे सवाल
खोखला साबित हुआ 24×7 निगरानी का दावा प्रोजेक्ट में कम क्षमता के सोलर पैनल और बैटरी लगाए गए। इसके चलते कैमरे चौबीस घंटे चलने के बजाय दिन में केवल 15-18 घंटे और बारिश व कम धूप में महज 10-12 घंटे ही काम कर पाते हैं। इसके बावजूद अफसरों ने इसे कागजों पर ’24×7 कार्यशील’ दिखाकर पूरा भुगतान कर दिया।
पेनाल्टी दबाई, शासन को आर्थिक हानि
नियमों (RFP) के अनुसार 4 घंटे से अधिक कैमरा बंद रहने पर ₹200 प्रति कैमरा प्रतिदिन की पेनाल्टी लगनी थी। शहर के करीब 130 कैमरों के लंबे समय तक बंद रहने के बावजूद कोई पेनाल्टी नहीं वसूली गई, जिससे राजस्व का भारी नुकसान हुआ।
अधूरे काम और बंद सर्वर पर भी मेहरबानी
सिविल लाइन चौराहा (जहां पोल डंप पड़े रहे पर लगाए नहीं गए), पारस स्कूल रोड और न्यू आरटीओ क्षेत्र में काम अधूरे होने के बाद भी भुगतान कर दिया गया। यही नहीं, साढ़े तीन महीने तक मुख्य सर्वर ठप रहने और ई-चालान बंद होने के बावजूद संबंधित अवधि की पूरी राशि जारी कर दी गई। महत्वपूर्ण एटीसीएस (Adaptive Traffic Control System) भी आज तक पूरी तरह चालू नहीं हो सका है।
बिना ‘CCTV Manager’ के संचालन
एग्रीमेंट के उल्लंघन पर ₹500 प्रतिदिन पेनाल्टी का प्रावधान था, लेकिन प्रोजेक्ट की रीढ़ माने जाने वाले ‘CCTV मैनेजर’ की नियुक्ति आज तक नहीं हुई। मैनपावर की इस कमी पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
खत्म बैंक गारंटी (PBG) पर भी बांटे चेक
प्रोजेक्ट को दो बार समय विस्तार (Extension) दिया गया, लेकिन आरोप है कि अवधि समाप्त (Expired) होने के बाद भी नई बैंक गारंटी जमा कराए बिना ही कंपनी के बिल प्रोसेस कर भुगतान जारी रखा गया।
उच्च स्तरीय जांच और ब्लैकलिस्ट करने की मांग
इस पूरे मामले को लेकर स्वतंत्र तकनीकी व वित्तीय ऑडिट की मांग की जा रही है। मांग है कि बंद कैमरों व गायब मैनपावर की पेनाल्टी की गणना कर गलत भुगतान की वसूली की जाए, एक्सपायर्ड PBG पर बिल पास करने वाले दोषी अधिकारियों की भूमिका तय हो और वित्तीय अनियमितता सिद्ध होने पर संबंधित वेंडर एजेंसी को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए।


