सागर: शहर से गांव तक वायरल फीवर का प्रकोप, अस्पतालों में बढ़ी भीड़, स्वास्थ्य विभाग अब भी बेखबर!
सागर। बारिश के मौसम के बीच सागर शहर समेत जिले के अलग-अलग हिस्सों में वायरल फीवर के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है। कई निजी अस्पतालों और छोटी-बड़ी क्लीनिकों में बुखार, सर्दी-जुकाम, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है इनमें बच्चे भी शामिल है। हालात यह हैं कि कई जगह मरीजों को चिकित्सकों से परामर्श लेने के लिए कतार में इंतजार करना पड़ रहा है।
मरीजों और उनके परिजनों के अनुसार, इस समय सामने आ रहे कई मामलों में अचानक तेज ठंड लगने के बाद बुखार आता है। बुखार कई दिनों तक बना रहने के साथ मरीजों को बदन दर्द, सर्दी-जुकाम और कमजोरी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों का कहना है कि बीमारी से पूरी तरह उबरने में करीब एक सप्ताह से दस दिन तक का समय लग रहा है।
डेंगू-मलेरिया की आशंका, लेकिन जांच में नहीं आ रही पुष्टि
वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों में ब्लड जांच के दौरान प्लेटलेट्स कम होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में मरीजों और परिजनों में डेंगू को लेकर चिंता बढ़ रही है। हालांकि, संबंधित मरीजों की डेंगू या मलेरिया जांच में बीमारी की पुष्टि नहीं होने की बात भी सामने आ रही है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार, केवल प्लेटलेट्स कम होना डेंगू की पुष्टि का आधार नहीं है। वायरल संक्रमण समेत कई अन्य परिस्थितियों में भी प्लेटलेट्स में कमी हो सकती है। इसलिए चिकित्सकीय सलाह और उचित जांच के बाद ही किसी बीमारी की पुष्टि की जानी चाहिए।
निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में बढ़ी भीड़
शहर के निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और छोटी क्लीनिकों में इन दिनों बुखार और वायरल संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या में इजाफा दिखाई दे रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग उपचार के लिए सागर पहुंच रहे हैं।
बारिश के मौसम में जलभराव, मच्छरों की बढ़ती संख्या, दूषित पानी और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के कारण मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और समय रहते जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण हो जाता है।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल जिले के स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। शहर से लेकर जिले के विभिन्न हिस्सों में वायरल फीवर के मरीज बढ़ने की चर्चाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक किसी विशेष एडवाइजरी, जागरूकता अभियान या बीमारी की स्थिति को लेकर विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर और अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर आमतौर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों को सावधानी बरतने, पानी जमा न होने देने, मच्छरों से बचाव करने और लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की जाती है। लेकिन सागर जिले में इस दिशा में फिलहाल विभागीय स्तर पर अपेक्षित सक्रियता नजर नहीं आने से सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएमएचओ से संपर्क में भी परेशानी
मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देवेश पटेरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे सीधे संपर्क नहीं हो सका। कार्यालय में मौजूद मीडिया प्रभारी से भी इस संबंध में स्पष्ट जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी।
आखिर कब जागेगा स्वास्थ्य महकमा?
बारिश के मौसम में बीमारियों का फैलाव कोई अचानक सामने आने वाली समस्या नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के पास इसके लिए पहले से निगरानी और रोकथाम की व्यवस्थाएं होती हैं। ऐसे में यदि अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है तो विभाग को कम से कम स्थिति की वास्तविकता जानने के लिए सर्वे, निगरानी और अस्पतालों से मरीजों के आंकड़े जुटाने की कवायद शुरू करनी चाहिए।
जरूरत इस बात की भी है कि स्वास्थ्य विभाग स्पष्ट करे कि जिले में वायरल फीवर के मामलों की वास्तविक स्थिति क्या है, डेंगू-मलेरिया की जांच कितनी हो रही है, कितने संदिग्ध मामले सामने आए हैं और मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल आम लोगों के बीच बीमारी को लेकर भ्रम और चिंता है, जबकि जिम्मेदार स्वास्थ्य अमला खामोश नजर आ रहा है।








