भाग्योदय ट्रस्ट की जांच की मांग को लेकर न्यायालय में परिवाद, बेनामी दान और ट्रस्ट संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप
सागर। भाग्योदय तीर्थ ट्रस्ट, जिसके द्वारा अस्पताल एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों का संचालन किया जाता है, उसके वित्तीय लेनदेन एवं कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग को लेकर न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया है। परिवादी प्रो. डॉ. सर्वेश जैन की ओर से अधिवक्ता एडवोकेट पवन नन्होरिया ने न्यायालय में यह परिवाद दायर किया।
परिवाद में उल्लेख किया गया है कि इस मामले को लेकर पहले मध्यप्रदेश पुलिस की विशेष स्थापना शाखा आर्थिक अपराध ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में आवेदन प्रस्तुत किया गया था, लेकिन वहां कोई कार्रवाई नहीं होने पर न्यायालय की शरण ली गई।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि भाग्योदय तीर्थ ट्रस्ट द्वारा बेनामी रूप से बड़ी राशि दान के रूप में लेकर उसे छोटी-छोटी रसीदों के माध्यम से दर्शाया गया, जिससे कथित रूप से काले धन को सफेद करने का प्रयास किया गया। साथ ही ट्रस्टियों पर ट्रस्ट की धनराशि एवं परिसंपत्तियों का निजी उपयोग करने के भी आरोप लगाए गए हैं।
गौरतलब है कि प्रो. डॉ. सर्वेश जैन और भाग्योदय अस्पताल के बीच विवाद पिछले चार-पांच महीनों से जारी है, जो शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इससे पूर्व इस मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में भी की जा चुकी है। शिकायत के आधार पर तहसीलदार के नेतृत्व में एक जांच दल भाग्योदय अस्पताल पहुंचकर जांच कर चुका है। फिलहाल उस जांच की रिपोर्ट आना शेष है।
अब न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत होने के बाद मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं। हालांकि, परिवाद में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और मामले में न्यायालय एवं संबंधित जांच एजेंसियों का अंतिम निर्णय आना बाकी है।


