सागर में मातृ-शिशु मृत्यु दर पर सख्ती: 3 महीने में सुधार नहीं तो होगी कार्रवाई, बनेंगी ‘सुमन पंचायतें
सागर। जिले में मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल के निर्देशन में जिले के सभी विकासखंडों में स्वास्थ्य अमले के लिए विशेष उन्मुखीकरण व क्षमता-वर्धन सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बीना में ब्लॉक स्तरीय वृहद प्रशिक्षण सह-समीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
संसाधन समान हैं, फर्क सिर्फ कार्य की समझ का है— कलेक्टर
प्रशिक्षण सत्र में पूर्व में हुई मैदानी भूलों की केस स्टडी पर गहन मंथन किया गया, ताकि भविष्य में हाई रिस्क प्रेगनेंसी (HRP) के मामलों में गलतियों की पुनरावृत्ति न हो। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्पष्ट कहा, आईएमआर और एमएमआर में देश-प्रदेश के अग्रणी क्षेत्रों और हमारे पास उपलब्ध संसाधन व मानव बल समान हैं। मुख्य अंतर कार्य की समझ और संवेदनशीलता का है। यदि हम अपनी कमियों को चिन्हित कर लें और प्रत्येक स्तर पर फॉलो-अप बेहतर करें, तो मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रसव से पूर्व ही गर्भवती महिला के सभी आवश्यक दस्तावेज (समग्र आईडी, आधार, विवाह प्रमाण पत्र, बैंक खाता) पूर्ण कराएं, ताकि प्रसव के बाद शासकीय सहायता राशि बिना रुकावट मिल सके।आशा कार्यकर्ता पात्र योग्य दंपतियों से निरंतर संवाद रखें। प्रथम प्रसव पूर्व जांच (फर्स्ट एएनसी) में किसी भी स्थिति में देरी न हो। सीएचओ और एएनएम सप्ताह में एक दिन स्वास्थ्य केंद्र पर अनिवार्य रूप से साथ बैठें। पूरे हफ्ते का डेटा और हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की स्थिति की संयुक्त समीक्षा करें। अनमोल ऐप में दर्ज की जाने वाली जानकारी में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यह डेटा शिशु और माता की भावी जीवन-रक्षा की नींव है। किसी भी स्थिति में मरीज/गर्भवती महिला की स्थिति स्टेबल किए बिना उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर न किया जाए। प्रसव पूर्व जांचों के दौरान खून की कमी वाली महिलाओं को तत्काल मेडिकल सपोर्ट दिया जाए। 1 वर्ष तक के बच्चों के रूटीन टीकाकरण और ‘एचबीएनसी’ (HBNC) होम-विजिट पर विशेष ध्यान दिया जाए।कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने जानकारी दी कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिले में ‘सुमन पंचायत’ मॉडल लागू किया जा रहा है। उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि मैदानी अमला अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा के साथ निभाए। आगामी 3 माह के भीतर यदि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर के आंकड़ों में सुधारात्मक परिणाम नजर नहीं आए, तो संबंधित अधिकारियों व मैदानी अमले पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशिक्षण सत्र में एसडीएम श्री रवीश श्रीवास्तव, सीएमएचओ डॉक्टर देवेश पटेरिया सहित एनएचएम बीपीएम / बीसीएम / डीईओ, एमपीएस, एमपीडन्यू, आशा, आशा सुपरवाईजर, एएनएम उपस्थित रहे।


