डाक विभाग के निजीकरण और अव्यावहारिक टारगेट के विरोध में डाक कर्मचारियों का आंदोलन शुरू, सागर में काली पट्टी बांधकर जताया विरोध
सागर। भारतीय डाक कर्मचारी संघ के आह्वान पर डाक विभाग के प्रस्तावित निजीकरण, कर्मचारियों पर थोपे जा रहे अव्यावहारिक कार्य-लक्ष्यों (टारगेट) तथा बढ़ते कार्य-दबाव के विरोध में बुधवार से देशव्यापी चरणबद्ध आंदोलन शुरू हो गया। इसके तहत सागर डाक संभाग के कर्मचारियों ने भी काली पट्टी बांधकर नियमित कार्य करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ संघीय परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ऋषि तिवारी ने बताया कि देशभर में डाक कर्मचारी अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। सागर सहित मध्य प्रदेश के विभिन्न डाकघरों में कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों में विभागीय नीतियों को लेकर रोष है, वहीं आंदोलन को सफल बनाने के लिए उत्साह भी दिखाई दे रहा है।
भारतीय डाक कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, जनसंख्या, उपलब्ध संसाधनों, कर्मचारियों की संख्या और वास्तविक कार्यभार का समुचित आकलन किए बिना अत्यधिक एवं अव्यावहारिक लक्ष्य निर्धारित किए जा रहे हैं। इन लक्ष्यों को पूरा करना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर कर्मचारियों पर लगातार दबाव बनाया जाता है और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
संघ का आरोप है कि कर्मचारियों से सेवा-शर्तों से बाहर के कार्य भी कराए जा रहे हैं। लगातार बढ़ते कार्य-दबाव, बार-बार की समीक्षा बैठकों और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली के कारण कर्मचारियों में मानसिक तनाव बढ़ रहा है। संघ का कहना है कि देश के कई हिस्सों में इस प्रकार के दबाव के कारण कर्मचारियों को गंभीर मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
कर्मचारियों का कहना है कि डाक विभाग की पारंपरिक जनसेवा की भावना को कमजोर कर उसे पूरी तरह लक्ष्य आधारित व्यावसायिक मॉडल की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे विभाग की सामाजिक भूमिका और आम जनता को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
संघ ने बताया कि आंदोलन के पहले चरण में सात दिनों तक कर्मचारी काली पट्टी बांधकर नियमित कार्य करते हुए विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। यदि सरकार और विभाग द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।


