MP : नर्मदा-क्षिप्रा पाइपलाइन फटी, 150 फीट तक उठा पानी का फव्वारा; घरों में घुसा पानी, लोगों का लाखों का नुकसान
इंदौर/महू। इंदौर जिले के महू क्षेत्र में रविवार सुबह नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना की पाइपलाइन फटने से हड़कंप मच गया। सुबह करीब 7:30 बजे इंदौर-खंडवा रोड स्थित भेरूघाट के पास अचानक पाइपलाइन टूट गई, जिसके बाद तेज धमाके जैसी आवाज के साथ पानी का विशाल फव्वारा आसमान की ओर उठने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पानी का फव्वारा करीब 150 फीट ऊंचाई तक पहुंच रहा था और उसका दबाव इतना अधिक था कि वह पास से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन की ऊंचाई तक दिखाई दे रहा था।
घटना के बाद आसपास के इलाके में तेजी से पानी फैल गया। देखते ही देखते कई घरों में पानी घुस गया, जिससे लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय निवासी विजय कोहली और सुगंध बाई कोहली ने बताया कि उनके परिवार के पांच मकान प्रभावित हुए हैं। अचानक तेज आवाज सुनाई देने के कुछ ही मिनट बाद पानी तेजी से घरों की ओर बढ़ा, जिससे परिवार के लोगों को जान बचाकर बाहर निकलना पड़ा।
रहवासियों के अनुसार घरों में रखा राशन, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं पानी में भीग गईं, जबकि कई सामान बह गए। इससे हजारों रुपये का नुकसान हुआ है।
तेज बहाव में बह गया चौकीदार का घर
पाइपलाइन फटने का असर आसपास के अन्य इलाकों पर भी पड़ा। वन विभाग की रोपणी के पास रहने वाले चौकीदार रमेश कोहली का कच्चा मकान तेज बहाव की चपेट में आ गया और पूरा ढांचा सामान सहित बह गया। वहीं भेरू बाबा मंदिर के पास स्थित बाबा ढाबे का टीन शेड भी पानी के साथ बह जाने की जानकारी सामने आई है।
एक घंटे तक बहता रहा पानी
स्थानीय निवासी सचिन कोहली ने बताया कि नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना की यह पाइपलाइन ओंकारेश्वर से उज्जैन तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई गई है। पाइपलाइन फटने के बाद करीब एक घंटे तक लगातार पानी का तेज बहाव जारी रहा। बाद में लगभग 8:30 बजे सप्लाई बंद किए जाने के बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
उन्होंने बताया कि पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर भी उछलकर घरों तक पहुंच रहे थे, जिससे कई मकानों की टीन की छतों को नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में इस तरह की घटना पहली बार हुई है।
लीकेज की शिकायतों के बावजूद नहीं हुई मरम्मत
रवि कोहली सहित कई स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइपलाइन में पिछले कई दिनों से लीकेज की समस्या बनी हुई थी। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को भी दी गई थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों पर गंभीरता से कार्रवाई होती तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था। अब रहवासी पूरे मामले की जांच और नुकसान का आकलन कर मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
पानी संकट पर भड़के रहवासी, निगम कार्यालय का किया घेराव
इधर शहर के दूसरे हिस्से में पानी की किल्लत को लेकर लोगों का गुस्सा भी सामने आया। ट्रेजर फेंटसी के पास स्थित ताप्ती परिसर के रहवासियों ने बिजलपुर स्थित नगर निगम के जल नियंत्रण कार्यालय का घेराव कर दिया। नाराज लोग कार्यालय के बाहर सड़क पर बैठ गए और नियमित जलापूर्ति की मांग करने लगे।
रहवासियों का कहना है कि पहले क्षेत्र में 24 घंटे पानी उपलब्ध रहता था, लेकिन पिछले कुछ दिनों से लगातार परेशानी बनी हुई है। इलाके में बोरिंग की सुविधा नहीं होने से लोग पूरी तरह नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर हैं। उनका आरोप है कि पानी छोड़े जाने के बावजूद उनके क्षेत्र तक पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पहुंच पाता।
रहवासियों ने बताया कि इस संबंध में जलकार्य प्रभारी एवं एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा बबलू से चर्चा हुई है। उन्होंने क्षेत्र का दौरा करने और टंकियों को पूरी क्षमता तक भरवाने का आश्वासन दिया है। लोगों ने कहा कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे विधायक मधु वर्मा से भी शिकायत करेंगे।
पानी के मुद्दे पर कांग्रेस में भी तकरार
शहर में पानी की समस्या को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया। वार्ड क्रमांक 20 में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने के प्रयास के दौरान कांग्रेस नेताओं के बीच विवाद हो गया।
कांग्रेस नेता चंद्रशेखर पटेल ने आरोप लगाया कि सुखलिया क्षेत्र में टैंकर भरने के दौरान उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और टैंकरों को पानी भरने से रोक दिया गया। इसके बाद उन्होंने एक वीडियो जारी कर नाराजगी जताई और यहां तक कह दिया कि वे, उनके बेटे और बहू पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद उनके बेटे और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष अमित पटेल ने अलग वीडियो जारी कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उनके लिए मां के समान है और वे पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। अमित पटेल ने कहा कि यह संगठन का आंतरिक मामला है और इसे पार्टी के भीतर रहकर सुलझाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नाराजगी कुछ व्यक्तियों से हो सकती है, लेकिन पार्टी से नहीं।
महू में पाइपलाइन फटने की घटना और शहर में बढ़ती जल समस्या ने एक बार फिर जल प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग अब नुकसान की भरपाई और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।


