आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनेगा संत रविदास मंदिर-कला संग्रहालय – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बनेगा संत रविदास मंदिर-कला संग्रहालय – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

सागर।  मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बुधवार को सागर पहुंचकर बड़तूमा में निर्माणाधीन संत शिरोमणि रविदास जी के मंदिर और कला संग्रहालय का अवलोकन किया। उन्होंने संत रविदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनका वंदन किया, साथ ही संपूर्ण मंदिर परिसर एवं संग्रहालय को प्रदर्शित करते हुए मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आत्मिक शांति और सामाजिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में उभरेगा। उन्होंने कहा कि संत रविदास जी के उपदेश और शिक्षा समाज को मार्गदर्शन देने का कार्य करते हैं।

अवलोकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, सागर विधायक श्री शैलेंद्र जैन, नरयावली विधायक श्री प्रदीप लारिया, गौरव सिरोठिया, एमडी टूरिज्म  टी. इलैया राजा, कलेक्टर श्री दीपक आर्य, एसपी  अभिषेक तिवारी, सहित अन्य जनप्रतिनिधि अधकारी मौजूद थे।

 

उल्लेखनीय है कि संत रविदास मंदिर नागर शैली में बनाया जा रहा है। मंदिर परिसर में अयोध्या के श्री राम मंदिर की ही तरह वंशी पहाड़पुर के पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। मंदिर के प्रवेश द्वार के साथ ही जल कुंड का निर्माण किया जा रहा है जो इस बात का प्रतीक है कि मंदिर परिसर में प्रवेश के पूर्व जल कुंड से गुजरते हुए आत्मा की शुद्धि और पवित्र मन के साथ ही गर्भ ग्रह में प्रवेश किया जाए। गर्भ गृह में शिखर और कलश की रचना की जाएगी साथ ही दो मंडप बनेंगे जहां एक साथ करीब एक हज़ार श्रद्धालु बैठकर भक्ति , आत्म साधना कर सकेंगे। निर्गुण भक्ति मार्ग के संत रविदास जी के अनुभवों को संजोय और मन चंगा तो कठौती में गंगा.. जैसे विचारों को लिए मंदिर परिसर के बाहर सी-शेप में संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। यह संग्रहालय प्रधानमंत्री संग्रहालय दिल्ली की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इस संग्रहालय में चार गैलरी रहेंगी जिनमें उन्नत टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर डिजिटल प्रोजेक्शन के माध्यम से संत रविदास जी की जीवन यात्रा , उनके अनुभव तथा अन्य मतों पर उनके प्रभाव आदि के बारे में जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इसके अतिरिक्त यहां पुस्तकालय और संगत हॉल भी बनाया जा रहा है। जहां श्रद्धालु संत रविदास और अन्य संतों जैसे कबीर दास, मीराबाई से संबंधित पुस्तकों का अध्ययन कर सकेंगे। संगत हॉल में विभिन्न सभाएं, संगोष्टियां आयोजित की जा सकेंगी।

इसी प्रकार संतो और भक्तों के ठहरने के लिए परिसर में भक्त निवास और डॉरमेट्री का भी निर्माण किया जा रहा है। भक्त निवास में 12 कमरे रहेंगे जो सर्व सुविधा युक्त रूप से निर्मित किया जा रहे हैं। इसी प्रकार डॉरमेट्री में 6 हॉल बनाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त श्रद्धालुओं, भक्तों, यात्रियों के लिए कैफेटेरिया भी निर्माणाधीन है साथ ही छांव में बैठने के लिए दो गजेबो भी तैयार किये जा रहे हैं।

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