IMA सागर द्वारा बेसिक मेडिकल इमरजेंसी प्रबंधन पर उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम
सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन सागर(आईएमए)द्वारा जूनियर चिकित्सकों, विशेष रूप से ब्लॉक मेडिकल ऑफिसरों (BMO) एवं मेडिकल ऑफिसरों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण एवं क्षमता-विकास कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। यह पहल सेमिनार श्रृंखला के रूप में संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में कार्यरत चिकित्सकों को संसाधन-सीमित परिस्थितियों में बेसिक मेडिकल इमरजेंसी के प्रभावी एवं समयबद्ध प्रबंधन हेतु प्रशिक्षित करना है।
इसी श्रृंखला के अंतर्गत हाल ही में दूसरा महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें दो अकादमिक सत्रों के माध्यम से हृदयघात (Heart Attack) तथा पॉयजनिंग/ओवरडोज़ प्रबंधन पर विस्तृत एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रथम सत्र में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रयंक जैन ने हृदयघात के प्रारंभिक पहचान एवं प्रबंधन के मूलभूत सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने हृदयघात के लक्षणों, प्रमुख जोखिम कारकों तथा ईसीजी (ECG) की सूक्ष्म व्याख्या एवं उसके क्लिनिकल महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं संसाधन-सीमित क्षेत्रों में भी समय पर ईसीजी की सही व्याख्या कर हृदयघात की शीघ्र पहचान एवं प्राथमिक उपचार प्रारंभ करना मरीज के जीवन रक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
दूसरे सत्र का संचालन डॉ. देबाशीष बिस्वास द्वारा किया गया, जिसमें पॉयजनिंग एवं ड्रग ओवरडोज़ के प्रबंधन पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। उन्होंने विभिन्न प्रकार की विषाक्तता, उनके लक्षणों की पहचान, प्रारंभिक स्थिरीकरण तथा सीमित संसाधनों एवं वेंटीलेटर जैसे उन्नत उपकरणों की अनुपस्थिति में भी सर्वोत्तम संभव उपचार प्रदान करने की रणनीतियों को व्यावहारिक उदाहरणों सहित समझाया। उन्होंने ऑक्सीजन सपोर्ट, बैग एवं मास्क वेंटिलेशन, समय पर रेफरल तथा टीम-आधारित प्रबंधन की आवश्यकता को विशेष रूप से रेखांकित किया।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम संसाधन-सीमित परिस्थितियों में गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जहां उन्नत चिकित्सा सुविधाएं सहज उपलब्ध नहीं होतीं, वहां चिकित्सकों का बुनियादी आपातकालीन ज्ञान एवं त्वरित निर्णय क्षमता मृत्यु दर को उल्लेखनीय रूप से कम कर सकती है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आगामी महीनों में इस शैक्षणिक श्रृंखला के अंतर्गत डायबिटिक इमरजेंसी, रोड ट्रैफिक एक्सीडेंट, ट्रॉमा प्रबंधन एवं अन्य महत्वपूर्ण आपातकालीन विषयों पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने सहभागिता की, जिनमें विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर एवं मेडिकल ऑफिसर प्रमुख रूप से शामिल रहे। प्रतिभागियों ने सत्रों को अत्यंत व्यावहारिक, उपयोगी एवं दैनिक चिकित्सकीय कार्य में सहायक बताया।
IMA सागर की यह पहल जूनियर चिकित्सकों की क्लिनिकल क्षमता सुदृढ़ करने एवं ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सराहनीय प्रयास मानी जा रही है। संगठन ने सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग की अपील की है।


