आइडेंटिफिकेशन, आइसोलेशन, ट्रीटमेंट, टेस्टिंग और आपदा प्रबंधन समूह की सक्रियता है आवश्यक -कलेक्टर सिंह

आइडेंटिफिकेशन, आइसोलेशन, ट्रीटमेंट, टेस्टिंग और आपदा प्रबंधन समूह की सक्रियता है आवश्यक -कलेक्टर सिंह

सागर-

गुरुवार को गोपालगंज वार्ड की आपदा प्रबंधन समूह की बैठक में सागर विधायक शैलेंद्र जैन, कलेक्टर दीपक सिंह, नगर निगम आयुक्त आरपी अहिरवार, सिटी मजिस्ट्रेट सीएल वर्मा एवं अन्य प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति में कोरोना संक्रमण को रोकने हेतु आवश्यक मुद्दों पर चर्चा की गई।

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बैठक को संबोधित करते हुए सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने कहा कि, यह संकट की घड़ी है और हम सभी के सामने एक चुनौती है कि, हम सागर ज़िले को संक्रमण से कैसे मुक्त करें? उन्होंने कहा कि, मध्यप्रदेश के क़रीब 45 ज़िले ऐसे हैं जहाँ एक जून से धीरे धीरे अनलॉक की प्रक्रिया शुरू की जाएगी परंतु, सागर उन ज़िलों में शामिल नहीं है। यह हमारे लिए एक प्रकार से अपमानित होने जैसी बात है।

उन्होंने कहा कि, यह शासन/ प्रशासन की असफलता नहीं बल्कि हमारी सबकी असफलता है। क्योंकि, हम स्व-अनुशासित नहीं हैं। वर्तमान में भी यही आवश्यक है कि, हम सभी स्वयं अनुशासित रहते हुए समस्त आवश्यक सावधानियां बरतें और कोविड संक्रमण को जागरूक रहते हुए ख़त्म करें।

उन्होंने कहा कि, सागर ज़िले में भी कोरोना संक्रमितों की पॉज़िटिविटी दर 22 से घटकर क़रीब पाँच प्रतिशत हो गई है जिसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं। परंतु, अनलॉक के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार पॉज़िटिविटी दर 5 प्रतिशत से नीचे होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि, यह सख़्ती से ही संभव है। जैसा कि, आज ज़िले में संक्रमित क्षेत्रों में सख़्ती के साथ कोरोना कर्फ्यू का प्रभावी क्रियान्वयन कराया जा रहा है, उससे अगले कुछ दिनों में बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आएँगे। और हम सभी के सहयोग से अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे।

कलेक्टर दीपक सिंह ने कहा कि, आइडेंटिफिकेशन, आइसोलेशन, ट्रीटमेंट, टेस्टिंग और आपदा प्रबंधन समूह की सक्रियता से कोरोना के नए प्रकरण मिलना बंद होंगे। उन्होंने कहा कि, इन पाँच सिद्धान्तों के आधार पर बेहतर कोरोना प्रबंधन किया जा सकता है। जैसे ही करोना संक्रमित व्यक्ति चिन्हित होता है उसे कोविड केयर सेंटर में आइसोलेशन में रखा जा रहा है। इन कोविड केयर सेंटर में समस्त प्रकार की सुविधाएँ हैं। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग कर उस से संबंधित व्यक्तियों को भी आइसोलेशन में रखा जाता है साथ ही उस क्षेत्र को कंटेन्मैंट क्षेत्र घोषित कर प्रतिबंधित किया जाता है। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति को आवश्यक ट्रीटमेंट उपलब्ध कराया जाता है और ऐसे क्षेत्र जहाँ कोरोना के नए प्रकरण मिल रहे हैं वहाँ आवश्यक टेस्टिंग की जाती है। इस प्रकार आइडेंटिफिकेशन, आइसोलेशन, ट्रीटमेंट और टेस्टिंग के द्वारा कोरोना संक्रमण पर क़ाबू पाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि, इस सब के लिए आपदा प्रबंधन समूह की सक्रियता बेहद आवश्यक है। क्योंकि, समूह के सक्रिय सहयोग से ही लोगों को जागरूक किया जा सकता है एवं कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर अपनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि, यदि इन सिद्धांतों का हम कड़ाई से पालन करें तो अगले कुछ ही दिनों में नए प्रकरण मिलना बंद हो जाएंगे और हम कोरोना पर क़ाबू पा सकेंगे।

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