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शराब कांड के बाद सागर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, इरशाद वली संभालेंगे सागर ज़ोन की कमान

By: गजेंद्र ठाकुर
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शराब कांड के बाद सागर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, इरशाद वली संभालेंगे सागर ज़ोन की कमान

शराब कांड के बाद सागर में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी, इरशाद वली संभालेंगे सागर ज़ोन की कमान

नए आईजी के साथ प्रशासनिक नेतृत्व में भी बदलाव, कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था में सुधार की उम्मीद

लंबे समय से एक ही जगह जमे अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी निगाह

सागर। बंडा क्षेत्र में अवैध शराब से हुई मौतों के मामले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर दौरे के तत्काल बाद संभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इरशाद वली को सागर संभाग ( जोन) का नया पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया है। वहीं दिलीप कुमार को सागर संभाग का नया संभागायुक्त बनाया गया है। सरकार ने शराब कांड की न्यायिक जांच के आदेश भी दिए हैं।

सरकार के इस फैसले को सागर संभाग में पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। खास तौर पर ऐसे समय में जब अवैध शराब कांड ने कानून व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी तय करने को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

पुलिस व्यवस्था में बदलाव की लंबे समय से उठ रही मांग

सागर संभाग में लंबे समय से पुलिस व्यवस्था में व्यापक सुधार और अधिकारियों-कर्मचारियों की रोटेशन प्रणाली लागू किए जाने की मांग उठती रही है। संभाग में लंबे समय से पदस्थ निरीक्षक, उपनिरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

इसी तरह पुलिस कार्यालयों में वर्षों से एक ही सीट पर जमे स्टेनो, बाबू और विभिन्न शाखाओं में अन्य कर्मचारियों के रोटेशन को लेकर भी चर्चा होती रही है। सवाल यह भी उठता रहा है कि आखिर लंबे समय से एक ही जगह काम कर रहे कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए स्थानांतरण अथवा रोटेशन की स्पष्ट व्यवस्था कब प्रभावी रूप से लागू होगी। जबकि स्थानीय स्तर पर इनकी गहरी जानपहचान होना लाज़मी है।

बता दें कुछ निरीक्षक सागर में रहते रहते कुछ साल ज़ोन के किसी जिले में चले जाते हैं और अपना नेटवर्क वहां से चलाते हैं। दरअसल ज़ोन स्तर पर ऐसी कोई व्यवस्था नज़र नहीं आती जिसमें इन्हें कुछ वर्षों बाद ज़ोन से बाहर किया जाए।

इसके अलावा ऐसे मामलों की भी चर्चा होती रही है, जहां कुछ कर्मचारी मौखिक आदेश अथवा अटैचमेंट के आधार पर वर्षों से मूल पदस्थापना से अलग स्थानों पर काम कर रहे हैं। अब नए पुलिस नेतृत्व के सामने यह भी बड़ी चुनौती होगी कि ऐसे मामलों की समीक्षा कर व्यवस्था को पारदर्शी और नियम आधारित बनाया जाए, वहीं विभाग में कुछ कर्मियों के लिए पूर्व अधिकारी तैनाती को लेकर एसआर में उल्लेख कर चुके हैं पर उनके जाते ही वह पन्ना नहीं खोला जाता।

सागर पुलिस की छवि को लेकर भी चुनौतियां

बीते कुछ वर्षों में सागर पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग मामलों में सवाल उठते रहे हैं। पुलिस की स्पेशल टीमों की कार्यप्रणाली से लेकर अपराधों की रोकथाम और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था तक कई मुद्दे सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे हैं।

हालांकि इन सभी मामलों में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है, लेकिन नए आईजी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुलिस व्यवस्था में जनता का भरोसा मजबूत करना और मैदानी स्तर पर जवाबदेही तय करना होगी।

शराब कांड ने बढ़ाई जवाबदेही की चुनौती

बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से हुई मौतों के बाद सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सागर पहुंचकर बीएमसी में भर्ती प्रभावित लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा उपचार व्यवस्था की जानकारी ली। सरकार ने इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की बात कही है।

इसी घटनाक्रम के बीच आईजी और संभागायुक्त की नई पदस्थापना को महज नियमित प्रशासनिक बदलाव के बजाय सरकार के सख्त संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

संभाग को मिले नए प्रशासनिक चेहरे

दिलीप कुमार ने सागर संभागायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली है, जबकि इरशाद वली को संभाग की पुलिस व्यवस्था की कमान दी गई है। दोनों अधिकारियों के सामने शराब कांड की जांच के साथ-साथ संभाग की कानून व्यवस्था, अवैध शराब और नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण, पुलिस की आंतरिक कार्यप्रणाली और मैदानी स्तर पर जवाबदेही मजबूत करने की चुनौती रहेगी।

सागर में नए नेतृत्व को लेकर अब जनचर्चा यह है कि क्या लंबे समय से लंबित पुलिस सुधारों को जमीन पर उतारा जाएगा? क्या वर्षों से एक ही जगह जमे अधिकारी-कर्मचारियों का रोटेशन होगा? क्या अटैचमेंट की व्यवस्था की समीक्षा होगी? और क्या पुलिस की उन आंतरिक व्यवस्थाओं में बदलाव आएगा, जिनको लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं?

बता दें

इरशाद वली 2004 बैच के मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। वे प्रदेश में कई अहम पुलिस जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। नर्मदापुरम जोन के आईजी और भोपाल में आईजी, SAF के पद पर भी रह चुके इरशाद वली को शराब कांड के बाद उनकी तैनाती को सागर संभाग की पुलिस व्यवस्था में बदलाव और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार के सख्त रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।

इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में नई टीम के फैसलों और मैदानी कार्रवाई से सामने आएगा। फिलहाल सरकार के इस बड़े फेरबदल ने सागर संभाग की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जरूर बढ़ा दी है।

गजेंद्र ठाकुर

By: गजेंद्र ठाकुर

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