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सागर कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज ड्रामा: थैले में पेट्रोल-रस्सी लेकर जनसुनवाई में पहुंची महिला, आत्मदाह की कोशिश

By: गजेंद्र ठाकुर•
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सागर कलेक्ट्रेट में हाईवोल्टेज ड्रामा: थैले में पेट्रोल-रस्सी लेकर जनसुनवाई में पहुंची महिला, आत्मदाह की कोशिश

जमीन में खूंटा गाड़ने के विवाद में दबंगों की मारपीट और थाने में सुनवाई न होने से आहत है पीड़िता का परिवार

सागर। मंगलवार दोपहर करीब साढ़े बारह बजे सागर कलेक्ट्रेट परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जनसुनवाई में न्याय मांगने आई एक महिला ने खुद को आग के हवाले करने की कोशिश की। महिला अपने पति और छोटे-छोटे बच्चों के साथ यहां पहुंची थी, जिनके पास एक झोले में रस्सी और पेट्रोल की बोतल रखी हुई थी। जैसे ही महिला के पति ने बैग से रस्सी बाहर निकाली, उसी दौरान महिला ने पेट्रोल की बोतल निकालकर खुद पर उड़ेलने का प्रयास किया। गनीमत रही कि वहां मौजूद सतर्क सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत फुर्ती दिखाते हुए उसे ऐसा करने से रोक लिया। घटना के बाद पीड़िता फफक-फफक कर रो पड़ी। रोते हुए उसने बताया कि गढ़ाकोटा पुलिस उसकी कोई फरियाद नहीं सुन रही है। वह रोज-रोज की परेशानी से बुरी तरह टूट चुकी है और अब अपनी जान दे देना चाहती है।

मामले की जड़ में दबंगों द्वारा की जा रही प्रताड़ना और पुलिस की कथित अनदेखी है। माधवकुटी निवासी पीड़िता काशीबाई सौर ने अपनी शिकायत में बताया है कि गांव के ही उजियार सिंह लोधी, रविंद्र लोधी, जित्तू लोधी, मीनारानी लोधी, उमरानी लोधी और मारपानी गांव के तीन अज्ञात लोग पिछले पांच सालों से उसके परिवार को लगातार परेशान कर रहे हैं। काशीबाई के मुताबिक, 30 अक्टूबर को जानवरों का खूंटा गाड़ने की बात को लेकर इन लोगों से विवाद हो गया था। इसके बाद सभी आरोपियों ने एकजुट होकर उसके घर पर धावा बोल दिया और लाठी-डंडों से बेतहाशा मारपीट की। दबंगों ने महिला को बालों से पकड़कर जमीन पर घसीटा, जिससे उसका बायां हाथ टूट गया (फ्रैक्चर) और शरीर के कई अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं।

हैरानी की बात यह है कि जब महिला को पिटता देख उसकी 16 साल की बेटी आरती, 8 साल का बेटा संतोष और 6 साल की मासूम बेटी अर्चना बीच-बचाव करने आए, तो हमलावरों ने उन बच्चों को भी नहीं बख्शा और उनके साथ भी मारपीट की। काशीबाई का आरोप है कि वह इस घटना को लेकर अब तक नौ बार थाने के चक्कर लगा चुकी है, लेकिन गढ़ाकोटा थाने में किसी ने उसकी गुहार नहीं सुनी। हमलावरों की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के खौफ के साये में जी रहे बच्चों ने डर के मारे स्कूल जाना भी छोड़ दिया है।

कलेक्ट्रेट में हुए इस पूरे हंगामे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला। उन्होंने रोती-बिलखती महिला और उसके पति को समझा-बुझाकर शांत किया। अधिकारियों द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई का ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही परिवार का गुस्सा शांत हुआ।

गजेंद्र ठाकुर

By: गजेंद्र ठाकुर

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