जबलपुर डाक विभाग से जुड़े मामले में कथित फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों से भर्ती पाने का आरोप; सत्यापन के बाद सभी की सेवाएं समाप्त, अब CBI दस्तावेजों और पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही
जबलपुर। ग्रामीण डाक सेवक (GDS) भर्ती में कथित तौर पर फर्जी 10वीं की अंकसूची लगाकर नौकरी हासिल करने के मामले में सागर जिले के सुरखी निवासी राजा बाबू अहिरवार भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की जांच के दायरे में हैं। जबलपुर डाक विभाग से संबंधित इस मामले में CBI ने राजा बाबू अहिरवार सहित आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
जांच में आरोप है कि इन अभ्यर्थियों ने GDS भर्ती के दौरान जो शैक्षणिक अंकसूचियां प्रस्तुत की थीं, संबंधित शिक्षा बोर्डों से सत्यापन कराने पर उनमें से कुछ को फर्जी पाया गया। राजा बाबू अहिरवार की नियुक्ति जबलपुर के पाटन सब पोस्ट ऑफिस में ग्रामीण डाक सेवक के तौर पर हुई थी। उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी के अनुसार उन्होंने जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन बोर्ड की 10वीं की अंकसूची लगाई थी। संबंधित स्तर पर सत्यापन के बाद इस अंकसूची को फर्जी बताए जाने की बात सामने आई।
10वीं के अंकों के आधार पर होता है GDS में चयन
यह पूरा मामला ग्रामीण डाक सेवक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। GDS भर्ती में अभ्यर्थियों का चयन 10वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाता है। संबंधित भर्ती चक्र में अभ्यर्थियों ने डाक विभाग के पोर्टल पर अपनी सेल्फ-अटेस्टेड 10वीं की अंकसूची अपलोड की थी।
इन्हीं दस्तावेजों में दर्ज अंकों और अन्य जानकारी के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अभ्यर्थियों को अलग-अलग डाकघरों में पदस्थ किया गया था।
बाद में डाक विभाग ने भर्ती में लगाए गए शैक्षणिक दस्तावेजों की संबंधित शिक्षा बोर्डों और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से जांच कराई। इसी सत्यापन प्रक्रिया के दौरान आठ अभ्यर्थियों की अंकसूचियों में कथित गड़बड़ी सामने आने की जानकारी जांच में सामने आई।
राजा बाबू अहिरवार की पाटन डाकघर में हुई थी नियुक्ति
जांच से संबंधित जानकारी के मुताबिक सागर के सुरखी निवासी राजा बाबू अहिरवार का चयन जुलाई 2024 के GDS भर्ती चक्र में हुआ था। उन्हें जबलपुर के पाटन सब पोस्ट ऑफिस में डाक सेवक के पद पर नियुक्त किया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 6 नवंबर 2024 से 23 जुलाई 2025 तक सेवा दी। इसके बाद उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में उनकी 10वीं की अंकसूची कथित तौर पर फर्जी पाए जाने के बाद विभाग ने उनकी सेवा समाप्त कर दी।
CBI ने आठ अभ्यर्थियों के खिलाफ दर्ज किया मामला
इस प्रकरण में CBI की कार्रवाई के दायरे में आठ अभ्यर्थियों को शामिल किए जाने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इनके नाम, निवास, नियुक्ति स्थल और संबंधित अंकसूची इस प्रकार हैं—
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मानवेंद्र सिंह सिकरवार — मुरैना — कुंडम — बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड
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बद्री प्रसाद यादव — टीकमगढ़ — संसारपुर, कटन — मध्य प्रदेश राज्य ओपन
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देवेंद्र सिंह चौहान — देवास — उमरिया पान — जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन
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राजा बाबू अहिरवार — सुरखी, सागर — पाटन, जबलपुर — जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन
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रमाकांत शर्मा — मुरैना — मोहतरा, कटनी — बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड
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प्रदीप खरे — मुरैना — कुड़ारी-उमरिया बरेला — बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड
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सौरभ शर्मा — मुरैना — पाटन — बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड
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नयन कुमार बिहार — रामखिरिया-शहपुरा — झारखंड एकेडमिक काउंसिल
इनमें पांच अभ्यर्थियों की पोस्टिंग जबलपुर और तीन की कटनी जिले में हुई थी।
अलग-अलग राज्यों के बोर्ड की अंकसूचियां जांच के दायरे में
इस मामले में एक अहम पहलू यह है कि कथित तौर पर फर्जी पाई गई अंकसूचियां अलग-अलग राज्यों के शिक्षा और ओपन बोर्ड से जुड़ी हुई बताई गई हैं।
जांच में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड, मध्य प्रदेश राज्य ओपन स्कूल, जम्मू एंड कश्मीर स्टेट ओपन और झारखंड एकेडमिक काउंसिल से संबंधित अंकसूचियों का उल्लेख सामने आया है।
इसी आधार पर जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या इन दस्तावेजों को तैयार कराने और भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने के पीछे एक से अधिक लोगों की भूमिका थी। हालांकि, कथित नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की पूरी तस्वीर CBI की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
18 सितंबर को डाक विभाग ने CBI को दी शिकायत
मामले में जबलपुर सब डिवीजन नंबर-1 के असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पोस्ट लवकुश पारेते की ओर से 18 सितंबर 2026 को CBI को लिखित शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
शिकायत में आठ अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर डाक विभाग में नियुक्ति हासिल करने का उल्लेख किया गया था। शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामले की जांच शुरू की और आठों अभ्यर्थियों के साथ अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया।
सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
जांच फिलहाल केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई है कि कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने, उन्हें अभ्यर्थियों तक पहुंचाने या भर्ती प्रक्रिया में इस्तेमाल कराने में अन्य लोगों अथवा सरकारी कर्मचारियों की भूमिका हो सकती है।
CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी अंकसूचियां कहां तैयार की गईं और उन्हें अभ्यर्थियों तक किस माध्यम से पहुंचाया गया। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि भर्ती पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने में किसी अन्य व्यक्ति की मदद ली गई थी या नहीं।
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत हुई या नहीं, साथ ही इस मामले में आठ अभ्यर्थियों के अलावा अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों और नियुक्ति रिकॉर्ड के आधार पर इन सभी बिंदुओं की जांच कर रही है।
सत्यापन के बाद सभी आठ की सेवाएं समाप्त
शैक्षणिक दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान गड़बड़ी सामने आने के बाद डाक विभाग ने संबंधित आठ अभ्यर्थियों की सेवाएं पहले ही समाप्त कर दी थीं। इसके बाद मामला CBI तक पहुंचा और अब इस प्रकरण में आपराधिक जांच चल रही है।
उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक राजा बाबू अहिरवार ने करीब नौ महीने तक सेवा की। उनकी नियुक्ति 6 नवंबर 2024 को हुई थी और वे 23 जुलाई 2025 तक पाटन डाकघर में सेवा में रहे।








