प्रेमचंद आज भी समाज को राह दिखाते हैं: टीकाराम त्रिपाठी
सागर। मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के हिंदी विभाग द्वारा आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी सभागार में व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सागर के प्रतिष्ठित साहित्यकार, प्रगतिशील लेखक संघ सागर इकाई के अध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक टीकाराम त्रिपाठी रहे।
टीकाराम त्रिपाठी ने अपने संबोधन की शुरुआत महाकवि दण्डी के दशकुमारचरित के मंगलाचरण से करते हुए डॉ. हरिसिंह गौर को नमन किया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज में असमानता बनी रहेगी, तब तक मुंशी प्रेमचंद की रचनाएं प्रासंगिक रहेंगी। उन्होंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों बूढ़ी काकी, पूस की रात, सद्गति सहित अन्य रचनाओं और उन पर बनी फिल्मों के माध्यम से उनके साहित्य की सामाजिक संवेदनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
भाषा अध्ययनशाला की अधिष्ठाता प्रो. रश्मि सिंह ने कहा कि प्रेमचंद ने मानव मन और मस्तिष्क का अत्यंत सूक्ष्म एवं सफल अध्ययन किया है, जो उन्हें विशिष्ट साहित्यकार बनाता है। उन्होंने पुस्तकों के महत्व पर भी अपने विचार रखे। विशिष्ट अतिथि प्रो. राजेंद्र यादव ने ठाकुर का कुआँ कहानी के मंचन से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए समाज की मानसिकता और सामाजिक विषमताओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. चंदा बेन ने की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य सदैव समाज को सही दिशा दिखाता रहेगा। विषय प्रवर्तन डॉ. संजय नाईनवाड ने किया। आभार प्रदर्शन डॉ. अरविन्द कुमार ने किया, जबकि संचालन डॉ. हिमांशु कबीर ने किया।
इस अवसर पर हिंदी विभाग के डॉ. अफरोज़ बेगम, डॉ. लक्ष्मी पाण्डे, डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. सुजाता मिश्र, भाषा विज्ञान विभाग के डॉ. बब्लू राय, डॉ. अभिज्ञान द्विवेदी सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।


