सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की बैठक में सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने रखे अहम सुझाव

हिंदी के डिजिटल भविष्य को नई दिशा देने वाले सुझावों पर सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने रखे विचार

सागर, 28 जुलाई।

नई दिल्ली में आयोजित सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में सागर सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े ने हिंदी भाषा के डिजिटल भविष्य, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग और भारतीय भाषाओं के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में उनके प्रस्तावों को सदस्यों ने भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बताते हुए सराहा।

बैठक में डॉ. वानखेड़े ने कहा कि 21वीं सदी में किसी भी भाषा का भविष्य उसकी डिजिटल क्षमता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में भागीदारी, प्रशासनिक उपयोग, ज्ञान-विज्ञान में उपलब्धता और आम नागरिक के दैनिक जीवन में उपयोगिता से तय होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल राजभाषा नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 के निर्माण की प्रमुख डिजिटल भाषा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार से “राष्ट्रीय AI भारतीय भाषा मिशन” शुरू करने का सुझाव दिया, जिसके माध्यम से हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के लिए रियल-टाइम अनुवाद, वॉयस ट्रांसलेशन, टेक्स्ट ट्रांसलेशन और डिजिटल भाषा संसाधन विकसित किए जा सकें। उनका कहना था कि इससे सरकारी सेवाएं अधिक सुलभ होंगी और भाषाई दूरी कम करने में भी मदद मिलेगी।

डॉ. वानखेड़े ने सभी सरकारी कार्यालयों, रेलवे, अस्पतालों, न्यायालयों, पुलिस थानों और नागरिक सेवा केंद्रों में AI आधारित बहुभाषी संवाद प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा, ताकि नागरिक अपनी मातृभाषा में संवाद कर सकें और अधिकारी उसे सहजता से समझ सकें।

उन्होंने “भारतीय भाषा एवं AI आयोग” के गठन का सुझाव देते हुए कहा कि यह आयोग भारतीय भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित करने, डिजिटल भाषा संसाधन तैयार करने, सरकारी वेबसाइटों के बहुभाषीकरण, भाषा अनुसंधान और स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य करे।

बैठक में उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और सरकारी संस्थानों में हिंदी के वास्तविक उपयोग के मंत्रालयवार आंकड़े उपलब्ध हैं तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए चलाए गए कार्यक्रमों का स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया है या नहीं।

सांसद ने “नेशनल हिंदी डैशबोर्ड” बनाने का सुझाव भी दिया, जिसमें सभी मंत्रालयों और विभागों में हिंदी के उपयोग, डिजिटल सेवाओं, वेबसाइटों, सोशल मीडिया, ई-ऑफिस और कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों। उनका मानना था कि इससे राजभाषा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून और नई तकनीकों से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाली हिंदी डिजिटल सामग्री तैयार करने, AI की मदद से भारतीय भाषाओं में ज्ञान संसाधन विकसित करने तथा युवाओं के लिए हिंदी आधारित डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म तैयार करने पर भी जोर दिया। साथ ही दूरदर्शन, आकाशवाणी और डिजिटल मीडिया को AI आधारित बहुभाषी मंच के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. लता वानखेड़े ने कहा कि भाषा संवाद और राष्ट्रीय एकता का माध्यम होनी चाहिए। हिंदी का विकास तभी सार्थक होगा जब वह सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ तकनीक, ज्ञान, प्रशासन और नवाचार की भाषा बने। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सुझावों पर चरणबद्ध तरीके से अमल होने पर भारत AI और भारतीय भाषाओं के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है तथा हिंदी डिजिटल युग की एक सशक्त वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित होगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here