भगवान शिव त्याग, करुणा और कल्याण का संदेश देते हैं: पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री
बेगमगंज। दीनदयाल कॉलोनी में आयोजित पंच दिवसीय रुद्राभिषेक महोत्सव के तृतीय दिवस पर कथा व प्रवचन करते हुए पंडित कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान शिव केवल देवों के देव महादेव ही नहीं, बल्कि करुणा, त्याग, तपस्या, कल्याण और परम सत्य के साक्षात स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का जीवन मानवता को निस्वार्थ सेवा और परोपकार की प्रेरणा देता है।
पंडित शास्त्री ने समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब कालकूट विष से पूरी सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान शिव ने स्वयं विषपान कर संसार की रक्षा की और नीलकंठ कहलाए। यही शिवत्व है कि स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों का कल्याण किया जाए।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव भोलेनाथ हैं, जो भक्त के वैभव को नहीं बल्कि उसकी सच्ची श्रद्धा और प्रेम को स्वीकार करते हैं। एक लोटा जल, कुछ बिल्वपत्र और निष्कपट भक्ति से भी वे प्रसन्न हो जाते हैं। उनके लिए राजा और निर्धन सभी समान हैं।
प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप जीवन के गहरे संदेश देता है। मस्तक पर सुशोभित चंद्रमा शीतलता, जटाओं से प्रवाहित गंगा पवित्रता, गले का सर्प निर्भयता तथा त्रिशूल धर्म, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। शिव हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता, क्रोध के स्थान पर करुणा, लोभ की जगह संतोष और द्वेष के स्थान पर प्रेम अपनाने की शिक्षा देते हैं।
उन्होंने श्रावण मास की महिमा बताते हुए कहा कि इस पावन महीने में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और “ॐ नमः शिवाय” का स्मरण विशेष फलदायी होता है। इससे मन को शांति, जीवन को पवित्रता और आत्मा को ईश्वर के निकट पहुंचने का मार्ग मिलता है।
पंडित शास्त्री ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे केवल शिवलिंग पर जल अर्पित न करें, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष का भी त्याग करें। जब मन निर्मल होगा, तभी भगवान शिव की सच्ची कृपा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि इस संसार में जो कुछ भी दिखाई देता है, वह शिव की शक्ति से ही संचालित है। भगवान शिव निराकार भी हैं, साकार भी, वे आदि, अनादि और अनंत हैं।


