पटवारियों के संविलयन के लिए नई नीति जारी, गृह तहसील में नहीं मिलेगी पदस्थापना,15 जून से पहले राजस्व विभाग का बड़ा फैसला
भोपाल। मध्य प्रदेश राजस्व विभाग ने तबादला अवधि समाप्त होने से ठीक तीन दिन पहले शुक्रवार को वर्ष 2026 के लिए पटवारियों की नई संविलयन नीति जारी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। साथ ही, जिस जिले में संविलयन होगा, वहां पदभार ग्रहण करने के बाद संबंधित पटवारी की वरिष्ठता उसी जिले की प्रचलित वरिष्ठता सूची के अनुसार निर्धारित की जाएगी।
राजस्व विभाग ने स्पष्ट किया है कि पटवारी जिला संवर्ग का पद होने के कारण उनके लिए अलग संविलयन नीति लागू की गई है। नई नीति के मुताबिक, पटवारी भर्ती परीक्षा 2022 का परिणाम घोषित होने से पहले नियुक्त हुए कर्मचारी अंतर-जिला संविलयन के लिए पात्र माने जाएंगे। हालांकि, वर्ष 2022 की परीक्षा के माध्यम से नियुक्त पटवारियों को भी कुछ निर्धारित परिस्थितियों में संविलयन का अवसर दिया जाएगा।
2022 भर्ती वाले पटवारियों के लिए विशेष प्रावधान
पटवारी परीक्षा 2022 में चयनित और नियुक्त हुए पटवारी केवल विशेष परिस्थितियों में ही संविलयन के लिए आवेदन कर सकेंगे। यदि पति या पत्नी में से कोई एक शासकीय कर्मचारी है और दोनों की एक ही जिले में पदस्थापना आवश्यक है, तो संबंधित जिले में रिक्त पद उपलब्ध होने पर संविलयन पर विचार किया जाएगा।
इसके अलावा विवाहित, विधवा, तलाकशुदा अथवा परित्यक्ता महिला पटवारियों को भी आवेदन की अनुमति होगी। गंभीर बीमारियों से पीड़ित पटवारी, जैसे कैंसर, किडनी रोग, डायलिसिस उपचाराधीन मरीज या ओपन हार्ट सर्जरी करा चुके कर्मचारी भी रिक्त पद होने की स्थिति में संविलयन का लाभ ले सकेंगे।
नीति में आपसी सहमति के आधार पर किए जाने वाले संविलयन मामलों को भी शामिल किया गया है। ऐसे आवेदन प्राप्त होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नए जिले में पूरी होगी परिवीक्षा संबंधी प्रक्रिया
नई नीति के अनुसार, जिन पटवारियों का संविलयन किसी अन्य जिले में किया जाएगा, उनकी परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने से संबंधित समस्त कार्रवाई नए जिले में ही की जाएगी। विभागीय नियमों और शर्तों का पालन उन्हें उसी प्रकार करना होगा जैसा पूर्व जिले में किया जाता था।
संविलयन के बाद संबंधित पटवारी की व्यक्तिगत नस्ती, लंबित जांच, दंडात्मक कार्रवाई और विशेष दायित्वों से जुड़ी सभी जानकारी पुराने जिले द्वारा नए जिले को उपलब्ध कराई जाएगी। संविलयन की कुल संख्या सामान्य प्रशासन विभाग की तबादला नीति के अनुरूप निर्धारित होगी।
ऑनलाइन होंगे आवेदन
संविलयन के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। आवेदन आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन, मध्य प्रदेश के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।
आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी श्रेणी संबंधी जानकारी दर्ज करनी होगी। इसमें सामान्य, पिछड़ा वर्ग, ईडब्ल्यूएस, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओपन वर्ग, ओपन महिला, भूतपूर्व सैनिक तथा दिव्यांग श्रेणी जैसी जानकारियां शामिल रहेंगी। विभाग ने साफ किया है कि ऑनलाइन आवेदन के साथ किसी प्रकार के दस्तावेज स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
इसके अलावा जिन पटवारियों के विरुद्ध लोकायुक्त या किसी अन्य प्रकरण में आपराधिक मामला दर्ज है, उन्हें संविलयन के लिए अपात्र माना जाएगा। संविलयन संबंधी अंतिम आदेश आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन, मध्य प्रदेश द्वारा जारी किए जाएंगे।
रिक्त पद होने पर ही मिलेगा संविलयन
नीति में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिस जिले में संविलयन की मांग की गई है, वहां संबंधित वर्ग के रिक्त पद उपलब्ध होने पर ही आवेदन स्वीकृत किया जाएगा। संविलयन की प्रक्रिया आरक्षण नियमों और जिला स्तरीय आरक्षण रोस्टर के अनुसार ही पूरी की जाएगी।
जिले के भीतर पदस्थापना का अधिकार कलेक्टर के पास रहेगा, लेकिन किसी भी स्थिति में पटवारी को उसकी गृह तहसील में पदस्थ नहीं किया जाएगा। संविलयन आदेश जारी होने के बाद संबंधित पटवारी को 15 दिनों के भीतर नए जिले में उपस्थित होकर कार्यभार ग्रहण करना होगा।
एक बार जिला आवंटन के बाद बदलाव नहीं
नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संविलयन के तहत एक बार जिला आवंटित होने के बाद दोबारा जिला परिवर्तन की पात्रता नहीं रहेगी। प्रशासनिक आधार पर किए गए संविलयन में पटवारी द्वारा नए जिले में पदभार ग्रहण करने के बाद उसकी वरिष्ठता उसी जिले की संधारित सूची के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आरक्षित पदों की संख्या से अधिक या आरक्षण संबंधी नियमों के विपरीत किसी भी प्रकार की पदस्थापना नहीं की जाएगी। जिला आवंटित होने के बाद संबंधित पटवारी के लिए उस जिले में अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना आवश्यक होगा।


