नशे का जाल और बेखौफ अपराधियों पर पुलिस का एक्शन प्लान
सागर। बुंदेलखंड का हृदय कहे जाने वाला सागर शहर पिछले कुछ समय से अपराध के बदलते स्वरूप से जूझ रहा है। कभी शांति का टापू माने जाने वाले शहर में अब नशे की सनक, सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने की चाहत और नाबालिगों की बढ़ती आपराधिक भागीदारी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि अब पेशेवर रंजिश नहीं, बल्कि रील और रौब के लिए चाकू और रेडियम कटर जैसे हथियार चलाए जा रहे हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन घटनाओं में शामिल अधिकांश आरोपी नाबालिग बताए जा रहे हैं, जो प्रतिबंधित नशीली दवाओं और शराब के मिश्रण के बाद नियंत्रण खो बैठते हैं। पुलिस और जानकारों के अनुसार, शहर में नशे की अवैध सप्लाई का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो बाहरी राज्यों और बड़े शहरों से सिरप व गोलियां मंगवाकर एजेंटों के जरिए किशोरों तक पहुंचा रहा है। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि डॉक्टर के पर्चे पर मिलने वाली दवाएं आखिर खुलेआम अपराधियों तक कैसे पहुंच रही हैं।
रील की चाहत और कटर अटैक
हालिया घटनाओं के विश्लेषण से सामने आया है कि कई वारदातों में आरोपी और पीड़ित के बीच कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी। बदमाश राह चलते लोगों को डराने, अपनी धौंस जमाने और सोशल मीडिया पर खुद को डॉन साबित करने के लिए हमले कर रहे हैं। हथियारों के साथ फोटो और वीडियो बनाना अब कई किशोरों की खतरनाक मानसिकता बन चुकी है। हाल ही में बुंदेली हास्य कलाकारों पर हुआ हमला भी इसी तरह की बिना वजह वाली हिंसा का उदाहरण माना जा रहा है।
कानून की नरमी और बढ़ती पुनरावृत्ति
पुलिस के सामने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। नाबालिग होने के कारण आरोपियों को जल्दी जमानत या सुधार गृह का रास्ता मिल जाता है। जानकारों का मानना है कि कई किशोर कानून की इसी नरमी का फायदा उठाकर बार-बार अपराध कर रहे हैं। यही वजह है कि ऐसे मामलों में अपराध की पुनरावृत्ति लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
अब पुलिस एक्शन मोड में
जिले में बढ़ती चाकूबाजी, नशाखोरी और गैंग गतिविधियों को देखते हुए नवागत पुलिस अधीक्षक ने सख्त रुख अपनाया है। मैदानी अमले को साफ निर्देश दिए गए हैं कि क्राइम कंट्रोल पुलिस की पहली प्राथमिकता होगी। माना जा रहा है कि पुलिस अब एक्शन मोड में नजर आ रही है और जल्द ही शहर में सक्रिय कतिपय गैंगों, नशा सप्लाई चेन और असामाजिक तत्वों पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। संकेत मिल रहे हैं कि अपराधियों को संरक्षण देने वाले नेटवर्क को भी चिन्हित किया जा रहा है।
संरक्षण का जाल और प्रशासनिक चुनौती
जानकारों का कहना है कि अपराध के इस बढ़ते नेटवर्क के पीछे स्थानीय स्तर पर संरक्षण भी बड़ी वजह है। कई बार जब पुलिस कार्रवाई करती है तो कुछ प्रभावशाली लोग इन युवकों के बचाव में उतर आते हैं। चर्चा यह भी है कि जेलों में बंद बड़े अपराधी इनक अपने कैरियर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
शहर में वर्षों से एक ही जगह पदस्थ पुलिसकर्मियों और दफ्तरों में जमे बाबुओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बार-बार शहर में तैनाती कराने वाले कर्मियों की स्थानीय अपराधियों से पहचान और संपर्क होना स्वाभाविक है। ऐसे में शहर और देहात के बीच नियमित रोटेशन और लंबे समय से जमे कर्मचारियों का स्थानांतरण भी जरूरी माना जा रहा है।
फिलहाल, शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सागर पुलिस नशे, गैंग संस्कृति और बेखौफ नाबालिग अपराधियों के इस बढ़ते जाल पर कितनी प्रभावी लगाम लगा पाती है।
जनता से सहयोग की अपील
नवागत पुलिस अधीक्षक ने शहरवासियों से भी अपील की है कि अपराध और नशे के खिलाफ इस अभियान में पुलिस का सहयोग करें। उन्होंने कहा है कि संदिग्ध गतिविधियों, नशे की अवैध बिक्री, गैंग गतिविधियों और हथियार लेकर घूमने वाले युवकों की जानकारी तत्काल पुलिस तक पहुंचाएं। एसपी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। उनका कहना है कि केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं, बल्कि समाज और नागरिकों की सहभागिता से ही शहर को फिर से शांत और सुरक्षित बनाया जा सकता है।


