सीटीजी और एनएसजी ने मॉक ड्रिल के जरिए परखी आतंकी हमलों से निपटने की तैयारी

सीटीजी और एनएसजी ने मॉक ड्रिल के जरिए परखी आतंकी हमलों से निपटने की तैयारी

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भोपाल | मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आतंकी चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया। मध्यप्रदेश पुलिस के काउंटर टेररिस्ट ग्रुप (CTG) और नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) द्वारा मंगलवार को शहर के प्रमुख संवेदनशील स्थलों पर एक वृहद संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।

इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य संभावित आतंकवादी हमलों के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया, आधुनिक हथियारों के सटीक उपयोग और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत करना था।
एक महीने के कड़े प्रशिक्षण का समापन
यह मॉक ड्रिल एनएसजी द्वारा मध्यप्रदेश पुलिस के लिए आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर की गई। 06 अप्रैल से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण सत्र 04 मई तक चला, जिसमें जवानों को आतंकवाद-रोधी रणनीतियों और आधुनिक तकनीकों का गहन प्रशिक्षण दिया गया।
रानी कमलापति स्टेशन और राजा भोज एयरपोर्ट पर ‘ऑपरेशन’
मॉक ड्रिल के लिए शहर के दो सबसे महत्वपूर्ण स्थलों को चुना गया:
1. रानी कमलापति रेलवे स्टेशन: यहाँ मॉल परिसर में आतंकियों द्वारा नागरिकों को बंधक बनाए जाने का कृत्रिम परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही सीटीजी और एनएसजी की संयुक्त टीम ने मोर्चा संभाला और रणनीतिक कौशल से आतंकियों को ढेर कर बंधकों को सुरक्षित बाहर निकाला।
2. राजा भोज विमानतल: एयरपोर्ट की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए यहाँ गहन अभ्यास किया गया, ताकि हवाई हमले जैसी स्थितियों में त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इन इकाइयों की रही सक्रिय भागीदारी
इस बड़े सुरक्षा अभ्यास में केवल कमांडोज ही नहीं, बल्कि सुरक्षा तंत्र की अन्य इकाइयां भी शामिल रहीं:
* डॉग स्क्वायड एवं बम डिस्पोजल दस्ता (BDS)
* एंटी-टेररिज्म यूनिट (ATS)
* स्थानीय पुलिस बल

वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण अवसर पर पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें उप पुलिस महानिरीक्षक श्री तरुण नायक, एआईजी श्रीमती आभा टोप्पो, और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री दीपक नायक सहित एनएसजी के आला अधिकारी शामिल थे।
निष्कर्ष: अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की मॉक ड्रिल का उद्देश्य सुरक्षा बलों की तत्परता का आकलन करना है। इससे न केवल जवानों का मनोबल बढ़ता है, बल्कि वास्तविक संकट के समय आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

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