समझे: सेवानिवृत्त पद से विदाई, अनुभव से नहीं
सीखने की कोई उम्र नहीं होती और अनुभव से बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता। अगर आप जीवन की बारीकियों को समझना चाहते हैं, तो उन वरिष्ठों के पास भी बैठें जो अपना पूरा जीवन किसी सेवा में बिताकर रिटायर हो चुके हो। उनके पास कहानियों के साथ उन समस्याओं का समाधान भी होता है, जिन्हें हम आज पहली बार देख रहे हैं,,
हाल ही में पन्ना जिले में हुई एक घटना ने पूरे प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों के स्वाभिमान को झकझोर दिया है। इसके विरोध में सागर का राजपत्रित पेंशन संघ और तमाम पूर्व अधिकारी कर्मचारी लामबंद हुए हैं। यह वही लोग हैं जिन्होंने अपने विभाग को जीवन के अनमोल वर्ष पूरी शिद्दत से दिए और कर्तव्य को सर्वोपरि माना, एक पत्रकार के रूप में मैंने इनमें से कई अधिकारियों कर्मचारियों को तब से देखा है जब मेरी पत्रकारिता शुरू हो रही थी। सीखने की ललक के कारण उनके साथ जो जुड़ाव शुरू हुआ, वह रिटायरमेंट के बाद भी आज तक बरकरार है। इनका विभाग भले ही उन्हें भूल जाए, लेकिन उनके अनुभव मुझे हमेशा मार्ग दिखाते रहें हैं।
आज की एक कड़वी हकीकत यह भी है कि जब ये पूर्व अधिकारी अपने ही विभाग में जाते हैं, तो उन्हें उचित सम्मान नहीं मिलता। लोग यह भूल जाते हैं कि रिटायरमेंट एक सतत प्रक्रिया है, आज जो व्यक्ति पद पर है, कल उसे भी इसी दौर से गुजरना होगा अगर आज वरिष्ठों की गरिमा का सम्मान नहीं होगा, तो कल खुद इस परिपाटी से कैसे बच पाएंगे आप सब?
सम्मान केवल पद का नहीं, बल्कि उस सेवा और त्याग का होना चाहिए जो उन्होंने समाज और उक्त विभाग के निर्माण में दिया है।
गजेंद्र ठाकुर सागर- 9302303212



