सागर में सार्वजनिक संपत्ति गंदी करने पर नगर निगम सख्त, कोचिंग संचालक पर लगाया जुर्माना

सार्वजनिक संपत्ति गंदी करने पर नगर निगम सख्त, कोचिंग संचालक पर लगाया जुर्माना

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सागर | स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में सागर को नंबर-1 बनाने और शहर की ‘विजिबल क्लीनलीनेस’ (दृश्य स्वच्छता) को बेहतर करने के लिए नगर निगम ने सख्त रुख अपना लिया है। सोमवार को डिग्री कॉलेज की दीवारों पर अवैध रूप से पोस्टर और पम्पलेट चिपकाकर शहर को बदरंग करने वाले एक संस्थान संचालक पर निगम ने सम्पत्ति विरुपण अधिनियम के तहत कार्यवाही करते हुए 500 रुपये का जुर्माना ठोका।

मौके पर ही उतरवाए पोस्टर

निगमायुक्त राजकुमार खत्री के निर्देशानुसार निगम की टीम ने दीवारों पर लगे विज्ञापनों के माध्यम से संस्थान संचालक को ट्रेस किया। कार्यवाही के दौरान संचालक ने अपनी गलती स्वीकार की और तत्काल अपने कर्मचारियों को बुलाकर दीवार पर चिपके पम्पलेट हटवाए। निगम ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में सार्वजनिक या निजी संपत्ति को विरूपित करने पर कड़ी दण्डात्मक कार्यवाही की जाएगी।

‘विजिबल क्लीनलीनेस’ पर 1500 अंकों का फोकस
निगमायुक्त श्री खत्री ने बताया कि स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 कुल 12,500 अंकों का है, जिसमें से 1500 अंक केवल दृश्य स्वच्छता (विजिबल क्लीनलीनेस) के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने कहा:
> “जो शहर प्रथम दृष्टि में साफ दिखेगा, वही स्वच्छता में अग्रणी होगा। हम ब्लैक स्पॉट खत्म कर रहे हैं, सड़कों से धूल हटा रहे हैं और दीवारों पर सुंदर चित्रकारी करवा रहे हैं। ऐसे में अवैध पोस्टर चिपकाना शहर की सुंदरता को बिगाड़ता है।”

क्या है संपत्ति विरूपण अधिनियम?

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994 के तहत बिना अनुमति के किसी भी सरकारी या निजी दीवार, खंभे या पेड़ पर पोस्टर चिपकाना, स्याही से लिखना या पेंट करना संज्ञेय अपराध है। इसमें जुर्माने के साथ-साथ कारावास का भी प्रावधान है। निगम प्रशासन ने विज्ञापन एजेंसियों और कोचिंग संचालकों को चेतावनी दी है कि वे प्रचार के लिए शहर की दीवारों का उपयोग न करें।

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