MP में करोड़ों की सरकारी जमीन घोटाला उजागर, राजस्व विभाग के 7 लोगों पर एफआईआर

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MP में करोड़ों की सरकारी जमीन घोटाला उजागर, राजस्व विभाग के 7 लोगों पर एफआईआर

शिवपुरी। जिले के करैरा अनुविभाग में सरकारी जमीन से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें करोड़ों रुपये की भूमि के साथ छेड़छाड़ किए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। नायब तहसीलदार सहित कुल सात लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
यह पूरा मामला कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी के निर्देश पर सामने आया। उन्होंने जांच के आदेश दिए, जिसके बाद डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ ने विस्तृत पड़ताल की। जांच में पाया गया कि राजस्व रिकॉर्ड के साथ कूटरचना की गई, दस्तावेजों में बदलाव किए गए और कई महत्वपूर्ण कागजात गायब कर दिए गए। इसके आधार पर तहसीलदार की शिकायत पर दिनारा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
इन पर दर्ज हुआ मामला
जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें नायब तहसीलदार अशोक श्रीवास्तव, पटवारी बृजेश यादव, बाबू लोकेन्द्र श्रीवास्तव, रिकॉर्ड रूम प्रभारी प्रताप पुरी, बाबू जीवनलाल तिवारी, लालाराम वर्मा और पटवारी मुकेश चौधरी शामिल हैं। इनमें से दो आरोपियों का निधन हो चुका है, जबकि एक व्यक्ति सेवानिवृत्त बताया गया है।
पुराने रिकॉर्ड में छेड़छाड़, लंबे समय से चल रहा खेल
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 1980-81 के सरकारी सर्वे नंबर 101 और 247 में 1989-90 से ही गड़बड़ी शुरू हो गई थी। इसके बाद लगातार वर्षों तक जमीन की खरीद-बिक्री होती रही। इस दौरान रिकॉर्ड के पन्ने गायब करना, सर्वे नंबर बदलना और बिना अनुमति बदलाव करना जैसी कई अनियमितताएं सामने आईं।
फर्जी पट्टों का जाल, फाइलें भी लापता
कुछ जमीनों पर ऐसे पट्टे जारी किए गए, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं मिला। ये पट्टे पूरी तरह फर्जी और काल्पनिक बताए जा रहे हैं। संबंधित फाइलों का गायब होना इस पूरे मामले को एक सुनियोजित घोटाले की ओर संकेत करता है।
पुलिस चौकी का रिकॉर्ड भी गायब
हैरान करने वाली बात यह है कि हेरफेर के दौरान गांव में मौजूद पुलिस चौकी का सर्वे नंबर तक रिकॉर्ड से हटा दिया गया। यह न केवल गंभीर लापरवाही बल्कि विभागीय मिलीभगत की भी ओर इशारा करता है।
शिकायत के बाद खुला पूरा मामला
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब जमीन की रजिस्ट्री के बाद ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कर उसे विक्रय के लिए प्रतिबंधित दिखाया गया। इस गड़बड़ी की शिकायत कलेक्टर तक पहुंची, जिसके बाद जांच शुरू हुई और करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन से जुड़ा यह पूरा मामला उजागर हो गया।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई जारी है।

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