नियमों की अनदेखी पड़ी भारी: सागर CMHO डॉ. ममता तिमोरी सेवा से पृथक, 37 करोड़ के घोटाले की भी जाँच तेज
सागर | मुख्य संवाददाता जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ममता तिमोरी के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उन्हें सेवा से निवृत्त (पृथक) करने का आदेश जारी किया है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल द्वारा जारी इस आदेश के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। जाँच में पाया गया कि डॉ. तिमोरी ने शासन से महत्वपूर्ण जानकारी छुपाकर नियमों के विरुद्ध पद का लाभ लिया।

अनिवार्य क्लीनिकल सेवा में मिली कमी
विभागीय जाँच के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, डॉ. तिमोरी ने निर्धारित 20 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल सेवा पूरी नहीं की थी। उन्होंने केवल 17 वर्ष 5 माह की सेवा दी थी, जो नियमों के तहत अपर्याप्त है। नियमानुसार, वे 30 अप्रैल 2024 को ही 62 वर्ष की आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की पात्रता रखती थीं, लेकिन जानकारी छुपाकर वे 2026 तक पद पर बनी रहीं।
शिकायतकर्ता ने खोला मोर्चा: भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले का खुलासा एक सजग नागरिक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2025 में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल और स्वास्थ्य मंत्री को साक्ष्यों के साथ पत्र लिखा था।
“सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965-66 के तहत कोई भी अधिकारी जानकारी छुपाकर पद का दुरुपयोग नहीं कर सकता। डॉ. तिमोरी को अपनी सेवा अवधि की जानकारी थी, फिर भी वे पद पर बनी रहीं। यह सीधे तौर पर शासन के साथ धोखाधड़ी है।” – शिकायतकर्ता
37 करोड़ के घोटाले की छाया
सेवा से पृथक किए जाने के अलावा, डॉ. तिमोरी पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर बादल मंडरा रहे हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, वित्त विभाग के माध्यम से 37 करोड़ रुपये के घोटाले की जाँच भी वर्तमान में प्रक्रियाधीन है। यह मामला उच्च न्यायालय में भी लंबित है।
प्रमुख बिंदु जो कार्यवाही का आधार बने:
* उम्र का तकाजा: 30 अप्रैल 2024 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बावजूद पद न छोड़ना।
* सेवा अवधि: 20 वर्ष की अनिवार्य क्लीनिकल सेवा के विरुद्ध मात्र 17.5 वर्ष की सेवा।
* धोखाधड़ी: शासन को गुमराह कर अनुचित तरीके से वेतन और भत्तों का लाभ लेना।
आगे की राह: रिकवरी और आपराधिक मामला
आने वाले दिनों में डॉ. तिमोरी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। शिकायतकर्ता अब उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने और अवैध रूप से लिए गए वेतन की रिकवरी की मांग कर रहे हैं।


