अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: IMA सागर ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आईएमए सागर ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया

सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा और गर्ल्स डिग्री कॉलेज, सागर के संयुक्त तत्वावधान में कॉलेज परिसर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी और स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
हर साल 8 मार्च को विश्व स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। वर्ष 2026 में इस दिवस का महत्व और भी बढ़ गया है, क्योंकि अब दुनिया केवल कागजी अधिकारों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन्हें वास्तविक रूप से लागू करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। इस वर्ष का उत्सव महिलाओं के अधिकारों, न्याय और समावेशी समाज के निर्माण पर विशेष रूप से केंद्रित रहा।

आईएमए द्वारा 18 अप्रैल (शनिवार) और 19 अप्रैल (रविवार) को महिलाओं के सशक्तिकरण एवं स्वास्थ्य विषय पर एक बड़ा सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है, जिसके कार्यक्रम का शुभारंभ आज ही किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. तल्हा साद ने युवा लड़कियों में पोषण की कमी और एनीमिया की समस्या पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 50-60 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से ग्रस्त हैं, जिससे थकान, कमजोरी और पढ़ाई में रुकावट आती है। इसका प्रमुख कारण आयरन और फोलिक एसिड की कमी है, जो मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव से और गंभीर हो जाती है। एनीमिया से बचाव के लिए संतुलित आहार अपनाना अत्यंत आवश्यक है—हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, गुड़ (प्राकृतिक आयरन का उत्कृष्ट स्रोत), फल और विटामिन सी से युक्त भोजन को नियमित रूप से शामिल करें। गुड़ को रोजाना भोजन में जोड़ने से आयरन की कमी स्वाभाविक रूप से पूरी हो सकती है। इसके अलावा, सरकारी अभियान ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के अंतर्गत साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड गोली (WIFS) का सेवन करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच और कीड़े की दवा (डीवॉर्मिंग) भी जरूरी है।

डॉ. तल्हा साद ने मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की, जैसे अत्यधिक रक्तस्राव (मेनोरेजिया) जो एनीमिया का कारण बनता है, मासिक धर्म में दर्द और ऐंठन (डिसमेनोरिया) तथा अनियमित चक्र। ये समस्याएं कॉलेज में अनुपस्थिति, मानसिक तनाव और आत्मविश्वास की कमी को बढ़ावा देती हैं। उचित स्वच्छता अपनाएं—सेनेटरी पैड को हर 4-6 घंटे में बदलें, साफ-सफाई बनाए रखें और संक्रमण से बचने के लिए साबुन से अच्छी तरह धुलाई करें। मिथकों को दूर करें और परिवार तथा स्कूल में खुली चर्चा को प्रोत्साहन दें। दर्द से राहत के लिए गर्म पानी की थैली, हल्का व्यायाम और डॉक्टर की सलाह पर दवा लें। ‘मासिक धर्म स्वच्छता योजना’ (MHS) के तहत सस्ते सेनेटरी पैड उपलब्ध हैं।
उन्होंने युवा लड़कियों में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों जैसे चिंता, अवसाद आदि पर भी जोर दिया, जो शैक्षणिक दबाव, शारीरिक बदलाव, सोशल मीडिया और लिंग भेदभाव से जुड़े होते हैं। ये मुद्दे आत्महत्या के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं। इनका प्रबंधन करने के लिए जीवन कौशल शिक्षा, परामर्श और सहायक वातावरण की आवश्यकता है। माता-पिता और शिक्षकों को संकेतों (उदासी, अलग-थलग रहना) पर ध्यान देना चाहिए और समय रहते मदद लेनी चाहिए। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) के तहत किशोर अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFHC) में गोपनीय सलाह उपलब्ध है।
कार्यक्रम की सफलता में प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी, डॉ. प्रहलाद सिंह, अन्य शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्राओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण रही।

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