होली के सात रंगों के साथ आत्मा को भी बनाएं सतोप्रधान – बीके छाया दीदी

होली के सात रंगों के साथ आत्मा को भी बनाएं सतोप्रधान – बीके छाया दीदी

सागर। पथरिया जाट में ब्रह्मकुमारीज के सेवाकेंद्र पर होली का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया जिसमें सागर जिले की संचालिका आदरणीय छाया दीदी ने सभी को होली का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार हम पहले होली को जलाते है फिर एक दूसरे को गुलाल का तिलक लगाते है, तथा अनेक रंगों से हम एक दूसरे के शरीर को रंगते है और आपस में एक दूसरे को गले लगाते है जिसका भावार्थ होता है कि हम सब एक है, एक के है और सदा एक रहेगें अर्थात होली भाईचारे और सद्भावना का पर्व है। लेकिन वर्तमान समय कहीं कहीं देखने को तो कुछ और ही मिलता है जहां दोस्त बनने के वजह आज के दिन को लोग पुरानी दुश्मनी निकालने का भी अवसर समझ लेते है, दीदी ने कहा कि जब तक हम शांति,प्रेम, खुशी,आनंद, संतुष्टता,धीरज और पवित्रता से अपनी आत्मा को नहीं रंगेंगे तब तक मन हमारा सुमन नहीं बन सकता अर्थात बिना ज्ञान के हमारे जीवन में सच्ची सद्भावना आ नहीं सकती। दीदी ने अपने वचनों से तन को स्थूल रंग से रंगने के साथ साथ मन को भी ईश्वरीय ज्ञान के रंग में रंगने को प्रेरित किया।

रैली के माध्यम से दिया नशामुक्ति का संदेश

बीके लक्ष्मी बहिन ने कहा कि आज के दिन लोग बड़ी मात्रा में नशा का सेवन भी करते है जिसका दुष्प्रभाव हमारे तन और मन दोनों पर पड़ता है उन्होंने कहा मानव जीवन बहुत अनमोल है इसे क्यों व्यर्थ में ऐसे ही नशे में घोल रहे हो, लोग अज्ञानवश कहते है कि शंकर जी भी नशा करते थे भांग पीते थे लेकिन उनको ये कौन समझाए कि वो ईश्वरीय नशा करते थे सदा परमात्म स्मृति में खोए रहते थे उनका नशा आत्मा को श्रेष्ठ बनाने वाला था। सभी देवों में उनकी तपस्या श्रेष्ठ थी इसलिए उन्हें देवों का देव महादेव कहा जाता है। अतः मनुष्य को चाहिए कि वो रोज ज्ञान का प्याला पिए, न की शराब का।

90वीं शिव जयंती पर शिवध्वज के नीचे सभी ने नशा मुक्ति का लिया संकल्प

केसली से आई बीके संध्या दीदी ने कहा कि हम सबके अंदर एक शक्ति है जिसे संकल्पशक्ति कहते है और जब हम राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास से एक परमात्मा शिव से अपने मन को जोड़ते है तो हमारी संकल्पशक्ति हजार गुना बढ़ जाती है। यही वह समय होता है जब हम किसी भी बुराई या नशे को बड़ी आसानी से त्याग सकते है, क्योंकि मन को सशक्त किए बिना हम किसी भी कमजोरी पर जीत नहीं पा सकते, इसीलिए तो कहा जाता है की “मन के हारे हार है, और मन के जीते जीत”।

बीके कल्पना दीदी ने सभी को व्यसन मुक्ति के नारे लगाकर नशे से होने वाले नुकसान बताए तथा राजयोग को बताया नशा छोड़ने का रामबाण इलाज।

कार्यक्रम में पधारे अतिथि सरस्वती विद्यालय के प्राचार्य नवीन विश्वकर्मा जी ने कार्यक्रम की बहुत प्रशंसा की और कहा कि ब्रह्माकुमारी बहिनें बहुत अच्छा मनुष्यों को सुधारने का कार्य कर रही है जन जन के जीवन को नशा मुक्त और खुशहाल बना रही हैं। बीके सरस्वती ने सभी को राजयोग का अभ्यास कराया तथा सभी को गहन शांति की अनुभति कराई। अंत में प्रसाद वितरण के साथ हुआ आयोजन का समापन।

पथरिया सेवाकेंद्र प्रभारी बीके पार्वती बहिन, बीके कामिनी बहिन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में संस्था से जुड़े अनेकों भाई बहिन शामिल रहे।

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