सागर में मृत्यु के 21 घण्टे बाद नसीब हुई एक शव को चिता, शमशान का रास्ता था बंद

सागर। जिले की रहली जनपद पंचायत अंतर्गत सोनपुर गांव में एक बेटे को अपने पिता के अंतिम संस्कार के लिए सरपंच के दरवाजे पर जाना पड़ा और अंततः सरपंच प्रतिनिधि को खुद ही समाने खड़े होकर अंतिम संस्कार कराना पड़ा। यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि राजस्व विभाग की बड़ी लापरवाही और सिस्टम की संवेदनहीनता का परिणाम है। यह तस्वीरें और यह कहानी प्रशासन की उस बेरुखी को उजागर करती हैं जहां इंसान मरने के बाद भी शांति नहीं पा सकता रहली तहसील के ग्राम पंचायत सोनपुर में श्मशान भूमि पर राजस्व विभाग द्वारा पट्टे वितरित कर दिए गए, ना पैमाइश हुई और ना सीमांकन जिसको जहां जगह मिली, उसने वहीं कब्जा कर लिया और देखते ही देखते श्मशान की जमीन ही गायब हो गई।

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वही गांव में जब एक वृद्ध व्यक्ति की मौत हुई, तो उसके बेटे को अंतिम संस्कार के लिए जगह ही नहीं मिली वही बता दें कि श्मशान जाने का रास्ता और भूमि दोनों पर ग्रामीणों का कब्जा ‌और कब्जाधारियों ने मुक्तिधाम के रास्ते मैं बाड़ा लगाकर बंद कर दिया अन्त्येष्टि के लिए लगभग 400-500 मीटर काधे पर सकरी पगडंडी से लकड़ी लेकर जाना पड़ा तब कहीं जाकर अन्तिम संस्कार हुआ मजबूर होकर पीड़ित परिवार सरपंच के दरवाजें पर गया,और आखिरकार सरपंच को खुद आगे आकर अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ी।

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