बुंदेलखंड का चर्चित डाकू चार्ली राजा, मोटर वाली साइकिल से पुलिस को देता था चकमा
सागर। आगे चोर पीछे- पीछे पुलिस यह लाइन लोग फिल्मों में सुनते हैं, लेकिन 80 के दशक में बुंदेलखंड में एक ऐसा डाकू हुआ जिसने इस कहानी को सच कर दिखाया। उसका नाम था चार्ली राजा। अपने तेज दिमाग और अनोखे तरीकों के कारण वह पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था।

बताया जाता है कि उस दौर में पुलिसकर्मी साइकिल से गश्त किया करते थे। चार्ली राजा ने भी अपनी साइकिल को ही हथियार बना लिया था, लेकिन उसकी साइकिल आम नहीं थी। उसने उसमें केरोसिन से चलने वाली मोटर फिट कर रखी थी। पुलिस जब पैडल मारते हुए उसका पीछा करती, तब चार्ली राजा अचानक मोटर चालू कर तेज रफ्तार से जंगलों और कच्चे रास्तों में गायब हो जाता था।
चार्ली राजा की यह अनोखी साइकिल आज भी सागर स्थित जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी के संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई है। इसे देखने वाले पुलिस अधिकारी और लोग आज भी हैरान रह जाते हैं कि जंगलों में रहने वाले एक डाकू ने उस समय इतनी तकनीकी समझ और संसाधन कैसे जुटाए होंगे।
जानकारों के अनुसार चार्ली राजा केवल मोटर लगी साइकिल ही नहीं, बल्कि मोटरसाइकिल और जीप का भी इस्तेमाल करता था। कहा जाता है कि वह बुंदेलखंड के एक कुख्यात बाहुबली के संरक्षण में पलने वाला बदमाश था और उसी के इशारों पर राजनीतिक दुश्मनों की हत्या तक करता था।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि 8 अगस्त 1982 को पन्ना जिले के मडला में तत्कालीन संसदीय सचिव कैप्टन जयपाल सिंह के सामने चार्ली राजा ने अपने साथी लोकपाल सिंह के साथ आत्मसमर्पण किया था।
बुंदेलखंड की लोक संस्कृति में भी चार्ली राजा का नाम दर्ज है। प्रसिद्ध लोकगायक देशराज पटेरिया के गीतों में भी उसका जिक्र आता है — लूट ले गये चार्ली राजा…। आज भी बुंदेलखंड में चार्ली राजा की कहानियां रोमांच और रहस्य के साथ सुनाई जाती हैं।


