ममता यादव: स्वतंत्र और जनपक्षीय पत्रकारिता का सशक्त चेहरा
भोपाल। वरिष्ठ पत्रकार और ‘मल्हार मीडिया डॉट कॉम’ की संस्थापक-संपादक ममता यादव ने अपने करीब 25 वर्षों के लंबे पत्रकारिता करियर में स्वतंत्र, जनपक्षीय और खोजी पत्रकारिता की एक मिसाल कायम की है। व्यावसायिकता और मुख्यधारा के दबावों से अलग हटकर उन्होंने हमेशा जनसरोकार, लोकतांत्रिक मूल्यों और आमजन की आवाज को अपनी पत्रकारिता के केंद्र में रखा है।
पत्रकारिता सफर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
सागर विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास और पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल करने वाली ममता यादव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2001 में ‘नवभारत’, भोपाल से एक प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में की थी। इसके बाद उन्होंने पीपुल्स ग्रुप, नईदुनिया (रायपुर), सांध्यप्रकाश, देशबंधु, एमबीडी ग्रुप तथा आयुष्मान आयुर्वेदिक पत्रिका सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
वर्ष 2014 में उन्होंने निष्पक्ष और सिद्धांतों से समझौता न करने वाली पत्रकारिता का संकल्प लेते हुए वेब पोर्टल ‘मल्हार मीडिया’ की नींव रखी। ऑफबीट रिपोर्ताज, संसदीय और राजनीतिक विश्लेषण तथा जमीनी मुद्दों पर गहराई से की गई रिपोर्ट्स उनके काम की मुख्य पहचान रही हैं।
शोध एवं फेलोशिप
पत्रकारिता के साथ-साथ शोध कार्यों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है:
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अजीम प्रेमजी फाउंडेशन संविधान फेलोशिप (2022-23): इसके तहत उन्होंने ‘पत्रकारीय कार्यव्यवहार में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ विषय पर विस्तृत अध्ययन किया।
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माधवराव सप्रे समाचार पत्र एवं शोध संस्थान फेलोशिप: ‘हिंदी समाचार पत्रों में भाषा का प्रयोग’ विषय पर आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय फेलोशिप हासिल की।
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लघुशोध: ‘भोपाल गैस त्रासदी और मीडिया के 25 वर्ष’ विषय पर गहन विश्लेषणात्मक शोध कार्य किया।
सम्मान एवं उपलब्धियां
पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और प्रांतीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है:
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2016: वेब पत्रकारिता के लिए राष्ट्रीय भड़ास मीडिया सरोकार सम्मान।
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2017: माधवराव सप्रे संग्रहालय द्वारा ‘लाल बलदेव सिंह पत्रकारिता पुरस्कार’।
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2020: सागर विश्वविद्यालय इतिहास विभाग का प्रथम एलुमिनाई सम्मान और उदिता सम्मान (PRSI)।
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2026: यूएन वूमन एवं मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया महिला सुरक्षा सम्मान।
पारंपरिक मीडिया से शुरू होकर स्वतंत्र डिजिटल पत्रकारिता तक का उनका ढाई दशक का सफर इस बात का प्रमाण है कि सत्ता और व्यवस्था से तीखे सवाल पूछते हुए भी जिम्मेदार पत्रकारिता को जीवित रखा जा सकता है।








