सड़कों की गुणवत्ता और लंबे समय तक रखरखाव पर फोकस, PWD ने 9 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और उनके लंबे समय तक रखरखाव को सुनिश्चित करने की दिशा में नई पहल शुरू की है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसके लिए ‘सड़क अनुरक्षण नीति’ तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नीति का उद्देश्य सड़कों के नियमित रखरखाव, गुणवत्ता जांच और इसके लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
9 सदस्यीय समिति करेगी नीति तैयार
नई नीति का प्रारूप तैयार करने के लिए PWD ने नौ सदस्यों की उच्चस्तरीय समिति गठित की है। IIT मुंबई के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. धर्मवीर सिंह को तकनीकी विशेषज्ञ की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) जोन के मुख्य अभियंता को समिति का समन्वयक बनाया गया है।
समिति में NHAI, MPRDC, लोक निर्माण विभाग और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। समिति सड़क अनुरक्षण से जुड़ी मौजूदा व्यवस्था का अध्ययन कर नई नीति के लिए सुझाव तैयार करेगी।
चार वर्षों के दिशा-निर्देशों की होगी समीक्षा
समिति पिछले चार वर्षों में लागू रहे दिशा-निर्देशों की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही नियमित सड़क रखरखाव, गुणवत्ता की निगरानी और वित्तीय फंडिंग से जुड़े विषयों पर भी सुझाव दिए जाएंगे।
समिति 30 सितंबर से काम शुरू करेगी और 30 अक्टूबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव को सौंपेगी।
सड़क निर्माण श्रमिकों के प्रशिक्षण पर भी सरकार का फोकस
मध्यप्रदेश सरकार ने सड़क निर्माण से जुड़े पंजीकृत श्रमिकों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए एक अलग छह सदस्यीय समिति भी गठित की है। यह समिति मैदानी स्तर पर काम करने वाले श्रमिकों की मौजूदा दक्षता का आकलन करेगी।
इसके बाद श्रमिकों की जरूरत के अनुसार आधुनिक तकनीकों पर आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल और पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इस पहल के जरिए सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता और टिकाऊपन के साथ श्रमिकों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।








