365 दिन, रोज 12 सेट सूर्य नमस्कार, 6 वर्षीय बच्ची ने पेश किया अनुशासन का अनोखा उदाहरण
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 45 सेट यानी 540 सूर्य नमस्कार लगातार करने का दावा
सागर। छह वर्षीय बच्ची ने लगातार 365 दिनों तक प्रतिदिन न्यूनतम 12 सेट सूर्य नमस्कार कर योग के प्रति अनुशासन और निरंतरता का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया है। 12 सेट सूर्य नमस्कार में 144 आसन होते हैं। बच्ची का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 45 सेट यानी 540 सूर्य नमस्कार लगातार बिना रुके करने का है।
स्वच्छ भारत अभियान सागर के नगर निगम ब्रांड एंबेसडर, समाजसेवी एवं प्रकृतिसेवक महेश तिवारी के अनुसार, बच्चों के स्वस्थ और अनुशासित जीवन के लिए योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उनकी बेटी ने पिछले 365 दिनों से नियमित योगाभ्यास किया।
परिवार के अनुसार, बच्ची की योग यात्रा को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो, लाइव और रिकॉर्डिंग के माध्यम से लगातार दर्ज किया गया। इस दौरान उसने प्रतिदिन न्यूनतम 12 सेट सूर्य नमस्कार के साथ भुजंगासन, चक्रासन, राजकपोतासन, उष्ट्रासन और हनुमान दंड सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास किया।
परिवार का कहना है कि इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि कोई रिकॉर्ड नहीं, बल्कि 365 दिनों तक लगातार अभ्यास और अनुशासन बनाए रखना है। बच्ची करीब दो वर्षों से योग कर रही है, लेकिन पहले उसका अभ्यास नियमित नहीं था। पिछले एक वर्ष में उसने योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया।
परिवार के अनुसार, इस दौरान बच्ची की स्कूल में 100 प्रतिशत उपस्थिति रही और उसने स्नैक्स, चिप्स, अन्य जंक फूड तथा मोबाइल की आदत से भी दूरी बनाए रखी।
योग दिवस पर भी दिया जागरूकता का संदेश
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बच्ची ने विभिन्न स्थानों पर लोगों के बीच योगाभ्यास कराकर नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया। श्री रावतपुरा सरकार फार्मेसी एवं बीएड कॉलेज में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में उसने 95 वर्षीय योग विशेषज्ञ विष्णु आर्य के साथ मंच साझा किया और उपस्थित लोगों के बीच योगाभ्यास कराया।
परिवार के अनुसार, बच्ची की योग यात्रा और उसके निरंतर प्रयासों को विभिन्न मीडिया संस्थानों के साथ जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से भी सराहना मिली। बच्ची के 200 और 300 दिन पूरे होने पर प्रकाशित समाचारों ने भी उसका उत्साह बढ़ाया।
कल से बेहतर बनने का संदेश
महेश तिवारी का कहना है कि बच्चों को हमेशा दूसरों से आगे निकलने की दौड़ में शामिल होने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने कल से थोड़ा बेहतर बनने का प्रयास करना चाहिए। मेहनत, अनुशासन और निरंतरता के छोटे-छोटे प्रयास ही आगे चलकर बड़ी उपलब्धि का आधार बनते हैं।
365 दिनों की यात्रा पूरी करने के बाद बच्ची का लक्ष्य योग के क्षेत्र में नियमित अभ्यास जारी रखते हुए भविष्य में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना है। परिवार के अनुसार, यह उपलब्धि अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि आगे की यात्रा की शुरुआत है।
इस पूरी यात्रा में पिता महेश तिवारी और माता साक्षी तिवारी का निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन रहा। वहीं चार वर्षीय छोटी बहन नियति तिवारी भी अपनी दीदी से प्रेरित होकर योगाभ्यास के प्रति रुचि लेने लगी है।
परिवार ने बच्ची को प्रोत्साहित करने वाले शुभचिंतकों और मीडिया साथियों का आभार व्यक्त किया है।








