कलेक्टर प्रतिभा पाल का बड़ा संदेश: हर गर्भवती तक पहुंचे बेहतर इलाज, संस्थागत प्रसव हो अनिवार्य
सागर जिले में मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देशन में जिले के सभी ब्लॉक में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किये जा रहे हैं। इसी क्रम में लगातार चौथे दिन कलेक्टर प्रतिभा पाल उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल हुईं। केसली में आयोजित हुए इस प्रशिक्षण सत्र में कलेक्टर पाल ने कहा कि, हाई रिस्क गर्भवती महिला के केस में यदि ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता हो तो ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, कम्युनिटी हेल्थ ऑफीसर यह सुनिश्चित करेंगे कि समय पर गर्भवती को ब्लड उपलब्ध हो जाए तथा स्वास्थ्य केंद्र पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी हो जाए। केसली में आयोजित प्रशिक्षण सत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से आवश्यक सभी उपायों, इंटरवेंशन की विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य अमले को मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने हेतु बेस्ट प्रेक्टिस को समझाया एवं आवश्यक निर्देश दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेष रूप से प्रत्येक महिला का एएनसी पंजीयन, बच्चों को रूटीन इम्यूनाइजेशन, एचबीएनसी कार्यक्रम के तहत गृह विजिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर पाल ने कहा कि मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा अनमोल एप में प्रत्येक गर्भवती महिला की सही और संपूर्ण जानकारी भरी जावे। जनकारी की शुद्धता ही गर्भवती माता के स्वास्थ्य एवं दी जाने वाली चिकित्सीय सहायता का आधार होती है। हाई रिस्क प्रेगनेंसी और ऐसी गर्भवती माताओं जिनको विशेष चिकित्सीय देखभाल की जरूरत है उसकी जानकारी मेडिकल ऑफिसर को दें। उन्होंने कहा कि मैदानी स्तर से आने वाले पंजीयन डेटा की सटीकता और शुद्धता की जिम्मेदारी सीएचओ और एएनएम की है। इसके लिए उन्होंने अनमोल एप को अच्छे से उपयोग करने एवं एप में पूरी गंभीरता और शुद्धता के साथ जानकारी दर्ज करने को कहा। उन्होंने कहा कि यही जानकारी भविष्य में गर्भवती माता के संपूर्ण चिकित्सीय देखभाल में प्रमुखता से उपयोगी होती है। इस दौरान उन्होंने सीएचओ और एएनएम को एक टीम की तरह काम करने को कहा।
उन्होंने निर्देश दिए कि आशा बहिनें गृह भ्रमण के दौरान प्रसव पूर्व जांच का महत्व परिवारों को समझाएं। गर्भवती माता और शिशु के स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछें, इस दौरान परिवार के सदस्यों को माता एवं शिशु के स्वास्थ्य एवं आवश्यक देखभाल संबंधी जानकारी भी दें।
उन्होंने कहा कि हाईरिस्क प्रेगनेंसी और एनिमिया के प्रभावी प्रबंधन से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। शिशु के समस्त वैक्सीनेशन को समय पर पूरा किया जाए। इसी प्रकार स्वास्थ्य अमला सुनिश्चित करे कि प्रत्येक प्रसव संस्थागत प्रसव हो। संस्थागत प्रसव से माता एवं शिशु को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि स्वास्थ्य अमले का कार्य मैदानी स्तर पर दिखना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि काम न करने वाले स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्यवाही की जावेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन के किसी भी विभाग से सबसे अधिक जिम्मेदारी वाला कार्य स्वास्थ्य विभाग का है। इसमें किसी भी लापरवाही, अनदेखी और कोताही बर्दास्त नहीं की जाएगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में ज़िला पंचायत सीईओ विवेक केवी, केसली एसडीएम राजनंदिनी शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, मैदानी अमला मौजूद था।


