वैचारिक स्वच्छता अभियान को ऐतिहासिक सफलता, सागर संभाग के स्कूलों में चलेगा ‘नो एब्यूज’ अभियान

विद्यालयों में अब चलेगा ‘नो एब्यूज’ अभियान, रोज दिलाई जाएगी सम्मानजनक भाषा की शपथ

सागर। सागर संभाग में अब विद्यालयों के माध्यम से सम्मानजनक भाषा और नारी सम्मान को बढ़ावा देने के लिए विशेष जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। संयुक्त शिक्षा संचालक, सागर संभाग द्वारा जारी आदेश के बाद सभी शासकीय एवं संबंधित विद्यालयों में “नो एब्यूज” अर्थात “माँ-बहन-बेटी की गालियाँ बंद हों” अभियान संचालित किया जाएगा। यह निर्णय वर्ष 2018 से डॉ. वंदना गुप्ता द्वारा चलाए जा रहे वैचारिक स्वच्छता अभियान को मिली बड़ी प्रशासनिक सफलता माना जा रहा है।

प्रशासनिक आदेश जारी

वर्षों के अभियान को मिली प्रशासनिक मान्यता

डॉ. वंदना गुप्ता द्वारा पिछले कई वर्षों से समाज में महिलाओं के सम्मान के प्रति जागरूकता लाने और अभद्र भाषा के प्रयोग को रोकने के उद्देश्य से वैचारिक स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान को संज्ञान में लेते हुए संयुक्त शिक्षा संचालक ने विद्यालयों में इसे लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग के इस फैसले को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विद्यालयों में लगेंगे ‘नो एब्यूज’ संदेश वाले बोर्ड

जारी आदेश के अनुसार सागर संभाग के सभी विद्यालयों में प्रमुख स्थानों पर “No Abuse” अथवा “माँ-बहन-बेटी की गालियाँ बंद हों” संदेश लिखे बोर्ड लगाए जाएंगे। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को सम्मानजनक भाषा के प्रयोग के प्रति प्रेरित करना है।

प्रतिदिन प्रार्थना सभा में दिलाई जाएगी शपथ

आदेश का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि प्रत्येक विद्यालय में प्रतिदिन प्रार्थना सभा के बाद सभी विद्यार्थी और शिक्षक सामूहिक रूप से यह संकल्प लेंगे कि वे जीवन में कभी भी माँ, बहन और बेटी से जुड़ी गालियों का प्रयोग नहीं करेंगे। शिक्षा विभाग का मानना है कि नियमित शपथ से बच्चों में सकारात्मक भाषा और अच्छे संस्कार विकसित होंगे।

हर वर्ष 17 सितंबर को मनाया जाएगा ‘नो एब्यूज डे’

विद्यालयों में प्रत्येक वर्ष 17 सितंबर को “नो एब्यूज डे – जनजागृति संकल्प दिवस” मनाया जाएगा। इस अवसर पर भाषण, निबंध, पोस्टर निर्माण, परिचर्चा, शपथ ग्रहण तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को नारी सम्मान, नैतिक मूल्यों और शिष्ट भाषा के महत्व से अवगत कराया जाएगा। शिक्षा विभाग ने इन गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के भी निर्देश दिए हैं।

नई पीढ़ी में संस्कार और सामाजिक चेतना विकसित करने पर जोर

शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल केवल गालियों के प्रयोग को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में सम्मानजनक संवाद, नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास है। इससे विद्यालयों का वातावरण अधिक सकारात्मक और संस्कारित बनने की उम्मीद है।

सभी अधिकारियों को भेजी गई आदेश की प्रति

जारी आदेश की प्रतिलिपि सागर संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, सभी जिलाधीशों, संभागायुक्त, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा विभाग सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और अनुपालन के लिए भेजी गई है, ताकि अभियान का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

डॉ. वंदना गुप्ता ने जताया आभार

वैचारिक स्वच्छता अभियान की संस्थापक डॉ. वंदना गुप्ता ने इस निर्णय पर संयुक्त शिक्षा संचालक और शिक्षा विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों से चल रहे जनजागरण, सामाजिक सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उनका विश्वास है कि यह पहल मध्यप्रदेश में सम्मानजनक भाषा और नारी सम्मान की संस्कृति को मजबूत करेगी तथा भविष्य में पूरे देश में इस अभियान के विस्तार का आधार बनेगी।

सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

शिक्षा विभाग द्वारा अभियान को प्रशासनिक मान्यता मिलने से इसे एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विद्यालय स्तर से बच्चों में सम्मानजनक भाषा और सकारात्मक व्यवहार की आदत विकसित होती है तो इसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ेगा और आने वाली पीढ़ियों में बेहतर सामाजिक मूल्यों का विकास होगा।

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