भाग्यौदय तीर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट की जाँच की मांग को लेकर जिला प्रशासन को सौंपा गया शिकायती पत्र
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के प्रोफ़ेसर डॉ. सर्वेश जैन ने कलेक्टर एवं रजिस्ट्रार से की शिकायत; नियम विरुद्ध चुनाव न कराने, ट्रस्टियों की आयु सीमा और 50% निःशुल्क बेड आरक्षित न रखने का लगाया आरोप।
सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) सागर के एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर एवं पेन मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर डॉ. सर्वेश जैन ने भाग्यौदय तीर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट की गतिविधियों और प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन का दरवाज़ा खटखटाया है। इस संबंध में उन्होंने सोमवार (22 जून 2026) को श्रीमान जिलाधिकारी एवं रजिस्ट्रार (पब्लिक ट्रस्ट) जिला सागर को एक औपचारिक शिकायती आवेदन पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जाँच के आदेश देने की मांग की है। इसके साथ ही पत्र की प्रतिलिपि सिटी मजिस्ट्रेट को भी प्रेषित की गई है।
— Gajendra Thakur (@kka_news) June 22, 2026
प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. सर्वेश जैन ने इससे पूर्व भी दिनांक 9 अप्रैल 2026 को इस संबंध में एक आवेदन कार्यालय को प्रस्तुत किया था। पूर्व में दिए गए उसी आवेदन का संदर्भ देते हुए उन्होंने वर्तमान शिकायत में ट्रस्ट के संचालन को लेकर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए हैं और मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर तत्काल प्रभाव से जाँच कराने का आग्रह किया है।
शिकायत पत्र में उठाए गए तीन मुख्य बिंदु
1. त्रैवाषिक चुनाव न होना: नियमानुसार भाग्यौदय तीर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट के त्रैवाषिक चुनाव समय पर संपन्न होने चाहिए थे, लेकिन पिछले पौने चार वर्ष (लगभग 3 वर्ष 9 माह) बीत जाने के बाद भी अब तक चुनाव प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई है।
2. ट्रस्टियों की सेवानिवृत्ति आयु का उल्लंघन: ट्रस्ट के नियमों के अनुसार ट्रस्टियों के लिए निर्धारित रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष तय की गई है। इसके बावजूद तय सीमा पार कर चुके ट्रस्टियों को अब तक पद से सेवानिवृत्त नहीं किया गया है, जो नियमों का खुला उल्लंघन है।
3. गरीबों के लिए निःशुल्क इलाज का अभाव: अस्पताल के मूल संविधान के नियमों के अनुसार, अस्पताल में कुल उपलब्ध बेड में से 50 प्रतिशत बेड गरीब और जरूरतमंद मरीजों के निःशुल्क इलाज के लिए आरक्षित होने चाहिए। वर्तमान में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे गरीब जनता इस लोक-कल्याणकारी सुविधा से वंचित है।
डॉ. सर्वेश जैन ने जिलाधिकारी से निवेदन किया है कि इन सभी गंभीर बिंदुओं पर तुरंत संज्ञान लिया जाए और एक निष्पक्ष टीम गठित कर भाग्यौदय तीर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट की विस्तृत जाँच कराई जाए, ताकि ट्रस्ट के संविधान और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। जिला कलेक्टर कार्यालय में शिकायत पत्र दर्ज कर (आवक क्रमांक सहित) रिसीव कर लिया गया है, जिस पर प्रशासन द्वारा आगामी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।


