बिना वर्क ऑर्डर निर्माण शुरू, निगम के दस्तावेजों से उठे नए सवाल, 3 नोटिस जारी होने के बावजूद नहीं हुआ अनुबंध, जांच की बात कह रहे अधिकारी
सागर। डॉ. हरिसिंह गौर वार्ड में आंगनबाड़ी केंद्र की बाउंड्रीवाल एवं सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में पहले स्थानीय पार्षद शिवशंकर यादव ने आरोप लगाया था कि बिना वर्क ऑर्डर जारी किए निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है।
पार्षद यादव के अनुसार करीब 15 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत आंगनबाड़ी बाउंड्रीवाल और सड़क निर्माण कार्य का ठेका दिए जाने के बाद भी नियमानुसार प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। इसके बावजूद निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बाउंड्रीवाल के पिलरों के लिए निर्धारित मानकों से कम गहराई के गड्ढे खोदे गए, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस बीच नगर निगम का एक पत्र सामने आया है, जिसमें कार्यपालन यंत्री द्वारा संबंधित ठेकेदार फर्म को अनुबंध निष्पादन एवं अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र के अनुसार निविदा स्वीकृत होने के बाद भी ठेकेदार द्वारा नियमानुसार अनुबंध नहीं किया गया था। सूत्रों के अनुसार निगम की ओर से इस संबंध में 3 नोटिस जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी नहीं हुईं।
यहीं से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि अनुबंध और वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुआ था, तो निर्माण कार्य शुरू कैसे हुआ? यदि कार्य स्थल पर गतिविधियां हुईं, तो उसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई? और यदि अनुमति नहीं थी, तो जिम्मेदारी किसकी बनती है?
मामले में जब नगर निगम के सब इंजीनियर महादेव सोनी से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि “बिना वर्क ऑर्डर के कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है। मैं पूरे मामले को दिखवाता हूं।”
सब इंजीनियर के इस बयान के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि एक तरफ पार्षद द्वारा बिना वर्क ऑर्डर कार्य शुरू होने के आरोप लगाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निगम के दस्तावेज अनुबंध प्रक्रिया अधूरी होने की ओर इशारा कर रहे हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि नगर निगम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि निर्माण कार्य किस स्थिति में शुरू हुआ, नियमों का पालन हुआ या नहीं, और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाएगी।
वहीं निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहें हैं।


