सरकार का बड़ा फैसला: अफसरों के खर्चों पर सख्ती, बिना अनुमति प्रदेश से बाहर दौरे पर रोक
भोपाल। वैश्विक आर्थिक और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने सरकारी खर्चों में मितव्ययिता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर जिला स्तर तक के अफसरों के अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण के निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब सरकारी खर्च पर प्रदेश से बाहर यात्रा, निजी होटलों में ठहरने और अनावश्यक बैठकों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
जारी निर्देशों के अनुसार भारसाधक सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी सरकारी खर्च पर प्रदेश के बाहर यात्रा तभी कर सकेंगे, जब उन्हें संबंधित भारसाधक सचिव की पूर्व अनुमति प्राप्त होगी। वहीं भारसाधक सचिवों को भी प्रदेश से बाहर सरकारी दौरे के लिए मुख्य सचिव से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
वर्चुअल बैठकों को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन बैठकों का आयोजन ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है, उनके लिए अधिकारियों को अनावश्यक रूप से एक स्थान पर एकत्रित होने से बचना होगा। इससे यात्रा, आवास और अन्य प्रशासनिक खर्चों में कमी आएगी। विभागों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
वाहन पूल और ई-व्हीकल पर जोर
सरकारी कार्यालयों में वाहन उपयोग को लेकर भी नई व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों को अलग-अलग वाहनों के उपयोग की बजाय वाहन पूल प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-व्हीकल) के उपयोग को प्राथमिकता देने को कहा गया है।
निजी होटलों में ठहरने पर रोक
सरकार ने खर्चों में कटौती के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निजी होटलों में ठहरने पर भी रोक लगाने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को सरकारी विश्राम गृह, सर्किट हाउस और अन्य सरकारी आवासीय सुविधाओं का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
आम लोगों के लिए भी सलाह
सरकार ने केवल प्रशासनिक खर्चों पर ही नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य को लेकर भी पहल की है। आम नागरिकों को खाद्य तेल का कम उपयोग करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग को इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोग संतुलित और स्वस्थ खानपान की ओर प्रेरित हों।
मितव्ययिता और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर
सरकार का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। नए निर्देशों का उद्देश्य सरकारी खर्चों में कमी लाना, प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना है। सरकार के इस फैसले का असर एसीएस, प्रमुख सचिव, सचिव, आयुक्त, कलेक्टर सहित विभिन्न स्तर के अधिकारियों पर दिखाई देगा।
राज्य शासन ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के दृष्टिगत शासकीय कार्यालयों में मितव्ययता बरतने और आमजन के बीच जन जागरूकता अभियान चलाने के जारी किए निर्देश
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— GAD, MP (@GADdeptmp) June 19, 2026
प्रमुख निर्देश एक नजर में
- बिना अनुमति सरकारी खर्च पर प्रदेश से बाहर यात्रा नहीं।
- भारसाधक सचिवों को भी मुख्य सचिव से अनुमति जरूरी।
- वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता।
- वाहन पूल व्यवस्था लागू करने के निर्देश।
- ई-व्हीकल के उपयोग को बढ़ावा।
- निजी होटलों में ठहरने पर रोक।
- सरकारी विश्राम गृहों का उपयोग अनिवार्य।
- आम लोगों को तेल कम खाने की सलाह।
- स्वास्थ्य विभाग चलाएगा जागरूकता अभियान।
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक खर्चों में कटौती और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


