तेलंगाना से आए दस्तावेज बने आधार, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द 

तेलंगाना से आए दस्तावेज बने आधार, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द 

भोपाल। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के पीछे भाजपा की गहन दस्तावेजी तैयारी सामने आई है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने मीनाक्षी नटराजन से जुड़े न्यायालयीन प्रकरण, समन और शिकायत संबंधी दस्तावेज मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष को उपलब्ध कराए थे।

बताया जाता है कि सोमवार को दस्तावेज भोपाल पहुंचे, जिसके बाद भाजपा ने मंगलवार सुबह रणनीति बनाई। हेमंत खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद भाजपा की ओर से राहुल कोठारी और पूर्व जज रोहित आर्य को आपत्तियों की पैरवी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

भाजपा प्रत्याशी महेश केवट, रजनीश अग्रवाल और राहुल कोठारी की ओर से नामांकन पत्र पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। महेश केवट और राहुल कोठारी ने न्यायालयीन प्रकरण की जानकारी छिपाने का मुद्दा उठाया, जबकि रजनीश अग्रवाल ने संपत्ति के विवरण में विसंगतियों पर सवाल खड़े किए।

जांच के दौरान निर्वाचन अधिकारी ने पाया कि शपथ पत्र के कई पन्नों पर सत्यापन अधूरा था, आपराधिक प्रकरणों से जुड़े कॉलम में स्पष्ट जानकारी दर्ज नहीं थी, आयकर विवरण निर्धारित प्रारूप के अनुरूप नहीं था तथा परिसंपत्तियों के विवरण में अंतर था। फॉर्म-26 में भी आपराधिक प्रकरण संबंधी जानकारी अधूरी पाए जाने का उल्लेख किया गया।

राज्यसभा निर्वाचन में आज नाम निर्देशन पत्र की जांच में यह तथ्य सामने आया कि कांग्रेस प्रत्याशी ने अपराध से संबंधित जानकारी को छिपाया था। कानूनन उन्हें इसका उल्लेख करना था।

निर्वाचन अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन की ओर से प्रस्तुत तीन स्पष्टीकरण पत्रों को पर्याप्त नहीं माना और अंततः उनका नामांकन निरस्त कर दिया। भाजपा का दावा है कि तेलंगाना में सक्रिय राजनीतिक भूमिका के कारण मीनाक्षी नटराजन से जुड़े दस्तावेज समय रहते जुटा लिए गए, जिससे आपत्तियों को मजबूत आधार मिला।

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