चीता चौपाल से जागरूकता, लेकिन सागर में वन संरक्षण के बड़े सवाल अब भी बरकरार
गजेंद्र ठाकुर- सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में प्रस्तावित चीता स्थापना कार्यक्रम के तहत वन विभाग द्वारा आसपास के गांवों में चीता चौपाल अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को चीता संरक्षण, जैव विविधता और वन्यजीवों के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा वन संरक्षण में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
वन विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर लघु वृत्तचित्र, पावरपॉइंट प्रस्तुतीकरण और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं के माध्यम से लोगों को जानकारी दे रही हैं। कार्यक्रम में बच्चों और ग्रामीणों को चीता प्रजाति से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास भी किया जा रहा है। इस अभियान के संचालन के लिए 30 से अधिक वनरक्षकों और कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
हालांकि, चीता संरक्षण को लेकर चल रहे इस प्रचार अभियान के बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल भी उठ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि बारिश पूर्व पौधरोपण जैसे महत्वपूर्ण अभियानों की जानकारी आम जनता तक नहीं पहुंच पा रही है। वहीं जिले में जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई, वन्यजीवों की घटती संख्या और शिकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में विभाग अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाया है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल जागरूकता कार्यक्रम चलाने से वन संरक्षण के लक्ष्य पूरे नहीं होंगे। जमीनी स्तर पर वनों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर कार्रवाई और वन्यजीव संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाना भी उतना ही जरूरी है।
ऐसे में चीता चौपाल जैसे अभियान सकारात्मक पहल जरूर हैं, लेकिन वन विभाग को संरक्षण संबंधी मूल चुनौतियों पर भी उतनी ही गंभीरता से काम करना होगा, तभी चीता पुनर्स्थापना और वन्यजीव संरक्षण के प्रयास वास्तव में सफल माने जाएंगे।


