सागर में बंद छात्रावासों में चल रहा भुगतान का खेल!

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बंद छात्रावासों में चल रहा भुगतान का खेल!

सागर जिले में जनजातीय कार्य विभाग पर बड़ा सवाल, बंद भवनों में दर्ज हैं छात्र संख्या

सागर। जनजातीय कार्य विभाग, जिला सागर में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने की आशंका जताई जा रही है। विभाग के दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि जिले के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 11 छात्रावास वर्ष 2024 से बंद पड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद इन छात्रावासों में छात्रों की संख्या दर्ज कर शासन से राशि निकाले जाने के आरोप लग रहे हैं।

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सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से बंद छात्रावासों के नाम पर लगातार भुगतान किया गया। वहीं छात्रावास अधीक्षकों के खातों में मरम्मत, रिपेयरिंग और अन्य मदों की राशि ट्रांसफर होने की बात भी सामने आई है।

कलेक्टर के निर्देश के बाद खुला मामला

7 अगस्त 2024 को कलेक्टर की टीएल बैठक में छात्रावास भवनों का भौतिक सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद जारी पत्र में साफ उल्लेख किया गया कि कई छात्रावास जीर्ण-शीर्ण और अनुपयोगी अवस्था में हैं।

दस्तावेज में जिन छात्रावासों का उल्लेख है, उनमें सागर, देवरी, केसली, बण्डा, रहली और राहतगढ़ क्षेत्र के छात्रावास शामिल हैं। सभी में लगभग 50-50 सीटें दर्ज हैं।

बंद छात्रावास, फिर भी दर्ज बच्चे!

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन छात्रावासों में वर्षों से छात्र नहीं रह रहे, वहां भी बच्चों की दर्ज संख्या रिकॉर्ड में दिखाई गई। आरोप है कि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर भोजन, रखरखाव और अन्य खर्चों की राशि निकाली जाती रही।

मरम्मत राशि के दुरुपयोग का आरोप

वित्तीय वर्ष 2024-25 में भवनों के पूर्व शुद्धिकरण, मरम्मत और रिपेयरिंग के लिए जारी राशि के दुरुपयोग के आरोप भी लगे हैं। बताया जा रहा है कि कई भवन उपयोग में ही नहीं थे, फिर भी लाखों रुपए खर्च दर्शाए गए।

जांच हुई तो खुल सकते हैं बड़े राज

मामले में यदि निष्पक्ष जांच होती है तो विभाग के कई अधिकारियों और छात्रावास अधीक्षकों की भूमिका सामने आ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद छात्रावासों के नाम पर लंबे समय से सरकारी राशि का बंदरबांट किया जा रहा है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बंद छात्रावासों में छात्रों की उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई और शासन की राशि किसकी मिलीभगत से जारी होती रही?

इस विषय पर संबंधित अधिकारी जिला जनजातीय कार्यवाहक अदिति शांडिल्य से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया पर उनका फोन नही लगा।

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