IPL सट्टे पर इस सीजन पुलिस की चुप्पी! बीते वर्षों में हुई थीं रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाइयां

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आईपीएल सट्टे पर इस सीजन पुलिस की चुप्पी! बीते वर्षों में हुई थीं रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाइयां

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सागर। शहर में आईपीएल का खुमार चढ़ते ही सट्टेबाजी का बाजार भी गर्म हो गया मालूम होता हैं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ पिछले चार-पांच वर्षों में सागर पुलिस ने आईपीएल सट्टे के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाइयां कर करोड़ों के नेटवर्क ध्वस्त किए थे, वहीं इस साल अब तक पुलिस की डायरी में कोई बड़ा खुलासा दर्ज नहीं हुआ है। सूत्र बताते हैं कि शहर के नामचीन सटोरिये अब हाईटेक होकर भूमिगत तरीके से अपना कारोबार चला रहे हैं।

पिछला रिकॉर्ड और करोड़ों की रिकवरी

सागर पुलिस ने बीते सालों में सट्टेबाजों की कमर तोड़ने वाली कई बड़ी कार्रवाइयां की थीं। यदि रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो आंकड़े पुलिस की सक्रियता की गवाही देते हैं। वर्ष 2020 में कोतवाली क्षेत्र में पुलिस ने 63 लाख 9 हजार रुपये की ऐतिहासिक रिकवरी की थी। इसके बाद 2022 में करीब 25 लाख रुपये की नगद राशि के साथ गिरोह पकड़ा गया था। सबसे बड़ी कार्यवाही 2024-25 में हुई जब मोतीनगर पुलिस ने सागर से लेकर महाराष्ट्र के ठाणे तक दबिश दी, जिसमें दुबई लिंक और ऑनलाइन बेटिंग आईडी का पर्दाफाश हुआ था।

सट्टेबाजी के प्रमुख केंद्र और साइलेंट नेटवर्क

सूत्रों की मानें तो भीतर बाजार, सिंधी कैंप, बाहुबली कॉलोनी और उपनगर मकरोनिया जैसे इलाकों में आईपीएल सट्टे का जाल अभी भी बिछा हुआ है। पूर्व की कार्रवाइयों के कारण अब सटोरियों ने काम करने का तरीका बदल दिया है। अब सट्टा फिजिकल ठिकानों के बजाय ऑनलाइन ऐप्स और गुप्त आईडी के जरिए संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि सटोरियों की जानकारी होने के बावजूद इस सीजन में पुलिस का शिकंजा अब तक कस नहीं पाया है।

डाकपाल द्वारा सवा करोड़ की हेराफेरी का मामला

सागर जिले का वह मामला आज भी सुर्खियों में रहता है, जब एक उप डाकपाल ने जमाकर्ताओं के सवा करोड़ रुपये आईपीएल सट्टे में हार दिए थे। इस घटना ने साबित किया था कि सट्टे की लत किस कदर सरकारी तंत्र और आम जनता की जमा पूंजी को निगल रही है। इस तरह के मामलों के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पुलिस इस साल और अधिक सख्ती दिखाएगी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
बीते साल मार्च 2025 तक पुलिस ने अंतरराज्यीय नेटवर्क को ध्वस्त कर 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जो वेतन और कमीशन पर काम कर रहे थे। लेकिन इस साल की खामोशी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या सटोरिये वाकई में शांत बैठ गए हैं, या फिर पुलिस का मुखबिर तंत्र इस बार विफल साबित हो रहा है? शहर में सट्टेबाजों की सक्रियता की सुगबुगाहट तो है, लेकिन किसी बड़ी कार्यवाही का इंतजार फिलहाल बना हुआ है।

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