Bangal Election : बंगाल में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत: 200+ सीटों के साथ सत्ता पर कब्जा, टीएमसी 90 के भीतर सिमटी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है, जहां बीजेपी ने पहली बार स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता पर कब्जा कर लिया।
294 सीटों वाली विधानसभा में बजेपी ने 200 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त दर्ज करते हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन किया, जबकि टीमसी 90 सीटों के भीतर सिमट गई। यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही क्षेत्रीय राजनीति के ढांचे के टूटने का संकेत है, जिसने बंगाल की सियासत को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सुबह से शाम तक बदली तस्वीर
सुबह 8 बजे मतगणना शुरू होते ही रुझानों में भाजपा ने बढ़त बनानी शुरू कर दी थी। शुरुआती घंटों में मुकाबला कड़ा दिखा, लेकिन दोपहर तक तस्वीर साफ हो गई कि सत्ता परिवर्तन तय है।
बजेपी 63 सीटें जीत चुकी थी और 141 पर आगे चल रही थी, जबकि टीएमसी 28 सीटों पर जीत और 55 पर बढ़त के साथ पीछे रह गई। कांग्रेस और अन्य दल सीमित सीटों तक ही सिमटे रहे। पूरे दिन जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़े, भाजपा की बढ़त मजबूत होती गई और अंततः यह अंतर निर्णायक बन गया।
भवानीपुर बना सियासी रणक्षेत्र
दिन भर का सबसे हाई प्रोफाइल मुकाबला भवानीपुर सीट पर देखने को मिला, जहां ममता बैनर्जी करीब 3000 वोटों से आगे रहीं और सुवेन्दू अधिकारी पीछे रह गए। यह मुकाबला 2021 की टक्कर का रीमैच था, जिसने पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींचा। काउंटिंग के दौरान तनाव भी देखने को मिला, जब भाजपा एजेंटों ने ममता बनर्जी पर बिना वैध पहचान पत्र के प्रवेश का आरोप लगाया। कुछ समय के लिए गिनती रुकने से माहौल और ज्यादा गर्म हो गया।
हिंसा और आरोपों के साये में चुनाव
चुनाव परिणामों के दिन कई जगहों से विवाद और हिंसा की खबरें सामने आईं। पश्चिम बंगाल के आसनसोल में मतगणना के दौरान तनाव की स्थिति बन गई। आसनसोल इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित काउंटिंग सेंटर के पास दो पक्षों के बीच झड़प हो गई। घटना के दौरान कुर्सियों और कुछ वाहनों में तोड़फोड़ की खबर सामने आई है। मौके पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और स्थिति को नियंत्रण में रखने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल मामले की विस्तृत जानकारी का इंतजार है।
वहीं भवानीपुर में स्ट्रांग रूम पर ड्रोन से निगरानी और भारी सुरक्षा बलों की तैनाती ने माहौल को हाई वोल्टेज बनाए रखा। इन घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखने का दावा किया।
प्रशासन की सख्ती और सतर्कता
नतीजों के बीच पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए कि किसी भी सरकारी कार्यालय से कोई फाइल या दस्तावेज गायब नहीं होना चाहिए। इसे संभावित सत्ता परिवर्तन के मद्देनजर उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे साफ है कि प्रशासन भी इस बड़े राजनीतिक बदलाव को लेकर पूरी तरह सतर्क नजर आया।
जश्न में डूबी भाजपा, सड़कों पर उत्साह
राज्यभर में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कोलकाता से लेकर दिल्ली तक पार्टी कार्यालयों के बाहर जश्न का माहौल रहा। केंद्रीय मंत्री सुकान्ता मजूमदार ने बालुरघाट में ढोल बजाकर जीत का जश्न मनाया, जबकि कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर नारेबाजी करते नजर आए। कई जगहों पर पटाखे फोड़े गए और मिठाइयां बांटी गईं, जिससे यह जीत एक बड़े जनउत्सव में बदल गई।
प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस जीत को जनता की शक्ति और सुशासन की जीत बताया। उन्होंने कहा कि “पश्चिम बंगाल में कमल खिल गया,” जो इस चुनाव का सबसे चर्चित बयान बन गया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह जीत सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा। इससे भाजपा की स्थिति और मजबूत होगी और विपक्ष के सामने नई चुनौती खड़ी होगी
हाई प्रोफाइल सीटों ने बढ़ाया रोमांच
इस चुनाव में कई हाई प्रोफाइल सीटों ने मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया। भवानीपुर, नंदीग्राम, दिनहाटा, भांगड़, संदेशखाली और आसनसोल दक्षिण जैसी सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली। नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी और TMC के पवित्र कर आमने-सामने रहे, जबकि भांगड़ में नौशाद सिद्दीकी और शौकत मोल्ला के बीच कड़ा मुकाबला हुआ।
खड़गपुर सदर, सोनारपुर दक्षिण और बेलेघाटा जैसी सीटों पर भी राजनीतिक दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी रही। इन सीटों ने साबित किया कि जमीनी स्तर पर मुकाबला बेहद कड़ा था, भले ही नतीजा एकतरफा नजर आया।


