महिला किसान: उत्पादन से बाजार तक विश्वास और गुणवत्ता की नई पहचान- डॉ प्रतिभा तिवारी
टीकमगढ़। भारतीय स्त्रीशक्ति मध्य प्रदेश द्वारा मिनोरा गाँव में ‘महिला किसान वर्ष 2026’ के उपलक्ष्य में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान उत्पादन से लेकर उपयोग तक की प्रक्रिया पर केंद्रित संपर्क, चर्चा और सर्वेक्षण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने खेती-किसानी में महिलाओं के अदृश्य योगदान और बाजार में उनकी बढ़ती भूमिका पर जोर दिया।
विश्वास और गुणवत्ता की गारंटी है महिला किसान
भारतीय स्त्रीशक्ति मध्य प्रदेश की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा तिवारी ने उत्पादन से उपयोग तक की यात्रा को विश्वास निर्माण की प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा कि:
* महिला किसान स्वयं उत्पादक होने के साथ-साथ उपभोक्ता भी है, इसलिए वह अनाज की गुणवत्ता और स्वाद को बेहतर समझती है।
* महिला किसान का सर्वेक्षण किताबी न होकर व्यावहारिक अनुभवों पर आधारित होता है।
* जब कोई महिला किसान उत्पाद बाजार में लाती है, तो वह उसकी गुणवत्ता की पहली और सबसे विश्वसनीय गारंटी होती है।
* उपयोगकर्ता की संतुष्टि ही किसी भी उत्पादन की वास्तविक सफलता का पैमाना है।
खेतों की असली रीढ़ हैं महिलाएँ
किसान संघ महाकोशल की प्रदेश उपाध्यक्ष ज्ञानमंजरी दीक्षित ने कहा कि आज के युग में उत्पादन का अर्थ केवल वस्तु बनाना नहीं, बल्कि उपभोक्ता के साथ संबंध बनाना है। उन्होंने इस बात पर खेद जताया कि ‘किसान’ शब्द सुनते ही केवल पुरुष का चित्र उभरता है, जबकि हकीकत में भारत के खेतों की असली रीढ़ महिलाएँ ही हैं।
अदृश्य श्रम को पहचान दिलाने का आंदोलन
सरपंच शान्ति प्रजापति ने कहा कि अक्सर खेतों के बाहर लगे बोर्ड पर पुरुष का नाम होता है, लेकिन उस मिट्टी को सींचने में महिला किसान का पसीना लगा होता है। उन्होंने महिला किसान वर्ष को एक उत्सव के बजाय महिलाओं के अदृश्य श्रम को पहचान दिलाने वाला आंदोलन बताया। उन्होंने कहा कि महिला सिर्फ अन्न नहीं उगाती, बल्कि देश का भविष्य बनाती है।
बाजार सर्वेक्षण में भागीदारी अनिवार्य
महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यसमिति सदस्य पूनम अग्रवाल ने कहा कि महिला किसान वर्ष मनाना तभी सार्थक होगा जब उत्पादन से लेकर बाजार के हर सर्वेक्षण तक महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसान का हाथ मिट्टी में है, तो महिला किसान का दिल उस मिट्टी की खुशबू में बसा है।
संपर्क अभियान और उपस्थिति
इस संपर्क अभियान के दौरान रीना श्रीवास्तव और अनुराधा बक्षी से संवाद किया गया। कार्यक्रम में कुल 67 महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कृषि उत्पादन व विपणन की बारीकियों पर चर्चा की।


