डॉक्टरों के मान-सम्मान और हक की लड़ाई, ISA ने भाग्योदय तीर्थ ट्रस्ट को दी गंभीर चेतावनी

डॉक्टरों के मान-सम्मान और हक की लड़ाई, आईएसए ने भाग्योदय तीर्थ ट्रस्ट को दी गंभीर चेतावनी

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सागर। मध्य प्रदेश के चिकित्सा जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब भारतीय एनेस्थीसियोलॉजिस्ट सोसाइटी (आईएसए) के मध्य प्रदेश चैप्टर ने सागर के प्रतिष्ठित भाग्योदय तीर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। सोसाइटी ने संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी को एक अत्यंत कड़ा और आधिकारिक पत्र लिखकर वहां कार्यरत वरिष्ठ डॉक्टरों की लंबित प्रोफेशनल फीस और उनके साथ किए जा रहे कथित दुर्व्यवहार पर अपनी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। यह मामला न केवल डॉक्टरों के आर्थिक अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि कार्यस्थल पर उनके सम्मान और गरिमा को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

विश्व एनेस्थीसियोलॉजिस्ट सोसायटी महासंघ से संबद्ध इस राज्य स्तरीय संगठन ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भाग्योदय तीर्थ अस्पताल में सेवाएं दे रहे वरिष्ठ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की फीस का भुगतान लंबे समय से अटका हुआ है। ताज्जुब की बात यह है कि चिकित्सकों द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर कई बार फॉलो-अप किए जाने के बावजूद संस्थान प्रबंधन ने इस ओर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। आईएसए ने इसे पेशेवर नैतिकता का उल्लंघन बताते हुए कहा है कि एनेस्थीसियोलॉजिस्ट किसी भी ऑपरेशन और मरीज की सुरक्षा की रीढ़ होते हैं, लेकिन उनके ही पारिश्रमिक को रोकना संस्थान की कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा करता है।

विवाद केवल पैसों तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्र में एनेस्थीसिया स्टाफ के साथ किए जा रहे अनुचित और असम्मानजनक व्यवहार का भी जिक्र किया गया है। आईएसए का कहना है कि डॉक्टरों को ऐसे माहौल में काम करने पर मजबूर किया जा रहा है जो उनके मनोबल को तोड़ता है। संगठन ने प्रबंधन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सभी लंबित देयकों का भुगतान नहीं किया गया और कार्यस्थल पर सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो वे कानूनी और पेशेवर प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।

सोसाइटी ने इस बात पर जोर दिया है कि अपमानजनक व्यवहार और भुगतान में देरी न केवल डॉक्टरों की गरिमा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि इससे पूरे चिकित्सा संस्थान की विश्वसनीयता और मरीजों की देखभाल के मानकों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फिलहाल, इस गंभीर नोटिस के बाद स्वास्थ्य गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि क्या ट्रस्ट प्रबंधन इस मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाएगा या फिर यह विवाद अदालती कार्रवाई तक पहुंचेगा। शहर के इस प्रमुख चैरिटेबल संस्थान के लिए यह स्थिति साख के संकट के रूप में देखी जा रही है।

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