IMA सागर का विश्व टीबी दिवस पर सीएचसी में जागरूकता, जांच और उपचार का विशेष अभियान
सागर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर शाखा एवं स्वास्थ्य विभाग सागर के संयुक्त तत्वावधान में आज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, देवरी में विश्व टीबी दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता शिविर का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अवसर पर चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। शिविर का उद्देश्य टीबी के लक्षणों, उपलब्ध जांचों तथा उपचार के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना था।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि देश में न केवल टीबी के मामलों में कमी आई है, बल्कि उपचार की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। वर्तमान में टीबी उपचार कवरेज लगभग 92% तक पहुंच चुका है।
उन्होंने बताया कि टीबी मुख्यतः संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से फैलने वाले जीवाणुओं के माध्यम से श्वसन द्वारा दूसरे व्यक्ति में फैलती है, जिसके कारण यह प्रायः फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि, यह रोग शरीर के अन्य अंगों जैसे आंख, रीढ़, मस्तिष्क, आंत एवं गर्भाशय को भी प्रभावित कर सकता है। अतः समय पर पहचान एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है।
टीबी के प्रमुख लक्षणों में दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, सीने में दर्द या भारीपन, खांसी के साथ खून या बलगम आना, लगातार कमजोरी एवं थकान, बिना कारण वजन कम होना, हल्का बुखार तथा रात्रि में अधिक पसीना आना शामिल हैं।
डॉ. साद ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में टीबी के स्पष्ट लक्षण नहीं होते, जिसे लेटेंट टीबी कहा जाता है। इसकी पहचान के लिए CyTB जांच सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क उपलब्ध है। जिन व्यक्तियों में यह जांच सकारात्मक आती है, उन्हें सप्ताह में एक बार कुल 12 खुराक का उपचार दिया जाता है, जिससे अगले 18 वर्षों तक टीबी विकसित होने की संभावना लगभग 80% तक कम हो जाती है।
कार्यक्रम में मुख्य ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना सरन ने बताया कि टीबी का उपचार डॉट्स कार्यक्रम के अंतर्गत 6 माह तक निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने पूर्ण एवं नियमित उपचार के महत्व पर विशेष बल दिया।


