सागर में निजी अस्पतालों ने जब मोड़ा मुँह, बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज ने नवजात को दिया जीवनदान

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सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ी मिसाल पेश की है। जन्म के तुरंत बाद ‘पेरिनेटल चिकनपॉक्स’ (Perinatal Chickenpox) जैसी दुर्लभ और जानलेवा बीमारी से जूझ रहे एक नवजात को डॉक्टरों की टीम ने मौत के मुँह से बाहर निकाल लिया। निजी अस्पतालों द्वारा हाथ खड़े कर देने के बाद, बीएमसी के डॉक्टरों ने न केवल चुनौती स्वीकार की बल्कि वेंटिलेटर सपोर्ट और आइसोलेशन में रखकर बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ कर दिया।

परिजनों के अनुसार, जन्म के बाद नवजात को सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी। गंभीर हालत को देखते हुए परिजन उसे 2-3 निजी अस्पतालों और विशेषज्ञों के पास ले गए, लेकिन कहीं भी राहत नहीं मिली। अंततः बच्चे को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुँचने पर बच्चे की स्थिति इतनी नाजुक थी कि वह स्वयं सांस भी नहीं ले पा रहा था, जिसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।

लाखों में एक है यह बीमारी – 50% होता है मृत्यु दर

विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के समय चिकनपॉक्स का संक्रमण एक अत्यंत दुर्लभ स्थिति है, जो 1 लाख में से किसी एक बच्चे को होती है। इसमें मृत्यु दर 50% तक होती है, यानी संक्रमित होने वाले आधे बच्चे दम तोड़ देते हैं। इसके साथ ही इसमें कई गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है, जैसे मस्तिष्क के विकास का रुकना, लिवर फेलियर और रक्त का थक्का जमना (Coagulation issues) , आंखों की रोशनी और सुनने की क्षमता पर प्रभाव पडना।

यह बीमारी अत्यंत संक्रामक है, जिससे इलाज करने वाले डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को भी संक्रमण का खतरा था। इसके बावजूद, विभागध्यक्ष डॉ. आशीष जैन के मार्गदर्शन और डॉ. अजीत असाटी व डॉ. महेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में टीम ने पूरी सावधानी के साथ बच्चे को आइसोलेशन में रखा।

उपचार टीम में  डॉ. रूपा अग्रवाल, डॉ. अंकित जैन, डॉ. अंकित जैन (सीनियर), डॉ. हर्ष पाटीदार, डॉ. पीयूष गुप्ता, डॉ. दिव्याश्री बघेल, डॉ. यश सोनी और डॉ. एस.के. पांडे सहित नर्सिंग स्टाफ का विशेष योगदान रहा।

अब स्वस्थ है नन्हा योद्धा

मीडिया प्रभारी डॉ सौरभ जैन ने बताया कि डॉक्टरों की निरंतर निगरानी और समर्पण का परिणाम है कि नवजात की हालत में अब उल्लेखनीय सुधार है। बच्चा अब बिना वेंटिलेटर के स्वयं सांस ले रहा है और सामान्य रूप से दूध भी पी रहा है। मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ पीएस ठाकुर और अधीक्षक डॉ राजेश जैन ने इस सफल उपचार के लिए पूरी टीम की सराहना करते हुए इसे संस्थान के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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