रिश्वतकांड में पूर्व क्षेत्रीय आयुक्त दोषी करार, पिप्लापुरे कोर्ट में नहीं हुए पेश; गैर-जमानती वारंट जारी
सागर । आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की विशेष अदालत (कोर्ट नंबर 3, जिला न्यायाधीश) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सागर के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त सतीश कुमार को भ्रष्टाचार के एक चर्चित मामले में दोषी (Convicted) करार दिया है। कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए केस को डिस्पोज (Disposed) कर दिया है। दंड के प्रश्न पर सजा मुक़र्रर अभी बाकी हैं जो अभियुक्त की मौजूदगी में किया जाना पता लगा हैं।
हालांकि, फैसले के दौरान एक नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। फैसले के दिन आरोपी सतीश कुमार (पिप्लापुरे प्रकरण के मुख्य आरोपी) अदालत में उपस्थित नहीं हुए। आरोपी की गैर-मौजूदगी को गंभीरता से लेते हुए विशेष न्यायाधीश ने कड़ा रुख अपनाया और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर दिया। EOW और स्थानीय पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
सूत्रों के हवाले से: भनक लगते ही कोर्ट परिसर से दूरी
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुनवाई के अंतिम चरण में सजा तय होने और दोषसिद्धि का फैसला आने की भनक लगते ही आरोपी पक्ष की ओर से कोर्ट में उपस्थिति नहीं दर्ज कराई गई। सूत्रों का कहना है कि EOW द्वारा पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के चलते आरोपी का बचना नामुमकिन हो चुका था। आरोपी के गायब होने पर अदालत ने बिना किसी ढील के सख्त आदेश जारी करते हुए वारंट थमा दिया।
क्या था पूरा मामला?
कारोबारी पर बनाया था दबाव: सागर के प्रसिद्ध बीड़ी कारोबारी एवं ‘बीआर एंड कंपनी’ के संचालक अनिरुद्ध पिप्लापुरे की फर्म पर EPFO के तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त सतीश कुमार ने कार्रवाई का शिकंजा कसा था।
₹5 लाख की रिश्वत मांग: फर्म की फाइल रफा-दफा करने और बड़ी पेनल्टी से बचाने के एवज में सतीश कुमार ने कारोबारी से ₹5 लाख की रिश्वत मांगी थी।
EOW का रंगे हाथों ट्रैप: बीड़ी कारोबारी की शिकायत पर EOW जबलपुर व सागर की टीम ने शिकायत का सत्यापन कराया। इसके बाद जून 2022 में योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी की गई और आरोपी सतीश कुमार को उनके शासकीय निवास पर ₹5 लाख की नगद रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोच लिया गया।
अदालती कार्रवाई का ब्योरा
चालान प्रस्तुत (27 फरवरी 2024): EOW ने गहन जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद 27 फरवरी 2024 को विशेष न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया (मामला संख्या: SC EOW/2174/2024/ CNR No: MP15010026582024)।
प्रथम सुनवाई (24 अप्रैल 2024): न्यायालय ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 24 अप्रैल 2024 से नियमित सुनवाई शुरू की।
अंतिम निर्णय (22 जुलाई 2026): करीब दो साल तक चली अदालती प्रक्रिया और बहस के बाद 22 जुलाई 2026 को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत दोषी ठहराया।
EOW सूत्रों का कहना है:”अदालत का यह फैसला भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश है। आरोपी के अनुपस्थित रहने पर वारंट जारी हो चुका है और टीम उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।”
खबर गजेंद्र ठाकुर 9302303212


