बारिश में भी उमड़ा आस्था का सैलाब: पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल, भगदड़ में 2 की मौत, 150 से अधिक घायल
ओडिशा के पुरी में भगवान श्रीजगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा श्रद्धा और भक्ति के बीच संपन्न हुई। बारिश के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर भगवान के दर्शन किए। हालांकि भीड़ के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति बनने से 2 श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हो गए।
पूरी मामला….
ओडिशा के श्रीक्षेत्र पुरी का ग्रैंड रोड (बड़ा दांडा) भगवान श्रीजगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा के दौरान श्रद्धा के महासागर में बदल गया। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर आयोजित इस भव्य रथयात्रा में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। लगातार बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के दर्शन एवं रथ खींचने के लिए उमड़ पड़े।
सुबह से पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मंगल आरती, मैलम, अवकाश पूजा, सूर्य पूजा, द्वारपाल पूजा और गोपाल बल्लभ के बाद भगवान को खिचड़ी भोग अर्पित किया गया। इसके बाद रथ प्रतिष्ठा, डोर लागी, पुष्पांजलि और पहंडी यात्रा की परंपराएं निभाई गईं। सबसे पहले मदन मोहन, श्रीरामकृष्ण और चक्रराज सुदर्शन रथ पर विराजमान हुए। इसके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में भगवान श्रीजगन्नाथ अपने-अपने रथों पर आरूढ़ हुए।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने तीनों रथों की परिक्रमा की। वहीं गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने भगवान के प्रथम सेवक के रूप में छेरा पहंरा की परंपरा निभाई। पहंडी नीति में देरी के कारण रथ खींचने की प्रक्रिया करीब दो घंटे विलंब से शुरू हुई।
रथयात्रा के दौरान मरीचिकोट छक और सिंहद्वार के पास भारी भीड़ के कारण भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हो गए। सभी घायलों का इलाज पुरी जिला मुख्य चिकित्सालय में चल रहा है।
रथयात्रा की सुरक्षा के लिए 13 हजार से अधिक पुलिसकर्मी और 400 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों की तैनाती की गई थी। इसके बावजूद भीड़ प्रबंधन में बड़ी चूक सामने आई। इस दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, राज्यपाल हरिबाबू कंभमपति, कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन समेत कई मंत्री और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। श्रीमंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन पूरे आयोजन की निगरानी में जुटा रहा।


