बिना विभागीय जांच कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते, हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति आदेश किया रद्द

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बिना विभागीय जांच कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकते, हाई कोर्ट ने सेवा समाप्ति आदेश किया रद्द
ग्वालियर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी को केवल अनुपस्थित रहने के आधार पर नियमित विभागीय जांच किए बिना सेवा से नहीं हटाया जा सकता। न्यायमूर्ति अमित सेठ ने विनोद राव शिर्के की याचिका स्वीकार करते हुए विभाग द्वारा जारी सेवा समाप्ति और अपीलीय आदेश दोनों को निरस्त कर दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अवधेश प्रताप सिंह सिसोदिया ने बताया कि विनोद राव शिर्के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय विदिशा में कंप्यूटर ऑपरेटर (गणक) के पद पर कार्यरत थे। विभाग के अनुसार वह 21 नवंबर 2015 से बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित थे। इसके बाद 30 दिसंबर 2016 को उन्हें निलंबित किया गया और एक फरवरी 2017 को विभागीय आरोप पत्र जारी किया गया। आरोपों में अनधिकृत अनुपस्थिति, अनुशासनहीनता और विभागीय आदेशों की अवहेलना शामिल थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि जांच अधिकारी के लिए गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध करना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि विभाग ने नियमित विभागीय जांच किए बिना सीधे सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और कानून का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर 25 फरवरी 2019 का सेवा समाप्ति आदेश और 29 दिसंबर 2021 का अपीलीय आदेश निरस्त कर दिया गया।
हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि विभागीय जांच को आरोप पत्र जारी होने की स्थिति से दोबारा शुरू किया जाए। साथ ही यदि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं तो उन्हें निलंबन अवधि मानते हुए नियमानुसार अस्थायी पेंशन का लाभ दिया जाए। अदालत ने कर्मचारी को 45 दिन के भीतर संबंधित अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आरोप पत्र का जवाब देने के निर्देश भी दिए हैं।

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