महाकाल मंदिर का एआई वीडियो विवादों में: पुजारियों और श्रद्धालुओं ने जताई कड़ी आपत्ति, प्रशासन ने की कार्रवाई की बात
सागर। उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर से जुड़ा एक एआई (Artificial Intelligence) वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसने धार्मिक समुदाय और मंदिर प्रशासन दोनों को आक्रोशित कर दिया है। वीडियो में मशहूर कार्टून किरदार ‘डोरेमॉन’ को महाकाल मंदिर के अंदर दाखिल होते हुए दिखाया गया है।
वीडियो में क्या दिखाया गया है
इस वायरल एआई वीडियो में ‘डोरेमॉन’ को महाकाल मंदिर के गर्भगृह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है। गर्भगृह की चौखट पर एक गार्ड जूते पहने खड़ा नजर आता है, जो डोरेमॉन को रोकते हुए कहता है— “अंदर जाने के लिए गैजेट नहीं, वीआईपी पास लगता है।” इसके बाद दृश्य में एक युवक मंदिर परिसर के बाहर ₹250 में वीआईपी पास बेचते हुए दिखाई देता है।
वीडियो के अगले हिस्से में डोरेमॉन को पास खरीदने के बाद गर्भगृह के भीतर दर्शन करते हुए दिखाया गया है। अंत में उसे जेल से बाहर निकलते हुए भी प्रदर्शित किया गया है। इस पूरे वीडियो को व्यंग्यात्मक ढंग से बनाया गया है, परंतु इसके धार्मिक भावनाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मंदिर समिति और श्रद्धालुओं की नाराज़गी
वीडियो सामने आने के बाद महाकाल मंदिर समिति, पुजारियों, और श्रद्धालुओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि वीडियो में दिखाई गई बातें पूरी तरह भ्रामक और असत्य हैं।
मंदिर प्रशासन का कहना है कि गर्भगृह के पास जूते पहनकर जाना वर्जित है और किसी भी व्यक्ति को इस तरह प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती। साथ ही, ₹250 का पास इस तरह खुले स्टॉल पर नहीं बेचा जाता। वीडियो में दिखाई गई बातें मंदिर की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाली हैं।
प्रशासन बोले छवि खराब करने की कोशिश, होगी कार्रवाई
मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह वीडियो जानबूझकर महाकाल मंदिर की छवि खराब करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा, “हमने वीडियो की जांच शुरू कर दी है। जो भी व्यक्ति या संस्था इस वीडियो को बनाकर वायरल कर रही है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
पुजारियों ने कहा यह सनातन धर्म पर कुठाराघात है
महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने वीडियो की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “इस वीडियो में गर्भगृह के बाहर गार्ड को जूते पहने दिखाया गया है, जो पूर्णतः अस्वीकार्य है। यह सनातन धर्म की भावनाओं पर कुठाराघात है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंधित किया जाना चाहिए और इसे बनाने एवं प्रसारित करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विवाद
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया, जबकि कुछ ने एआई तकनीक के गलत उपयोग पर चिंता जताई है।
पृष्ठभूमि : धार्मिक स्थलों पर एआई कंटेंट की बढ़ती चुनौतियाँ
पिछले कुछ महीनों में धार्मिक स्थलों और धार्मिक प्रतीकों से जुड़े एआई-जनरेटेड कंटेंट की संख्या में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वीडियो न केवल गलत जानकारी फैलाते हैं, बल्कि आस्था और सामाजिक सौहार्द पर भी असर डाल सकते हैं।
महाकाल मंदिर से जुड़ा यह एआई वीडियो एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि तकनीक के युग में रचनात्मक अभिव्यक्ति और धार्मिक मर्यादा के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। फिलहाल, मंदिर प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।


